सियासत : उन्हीं पुराने नेताओं को तोड़ पार्टी खड़ी करने की कोशिश में आप!, उत्तराखंड का क्या होगा?

521

उत्तराखंड में या तो नेताओं की कमी हो गई है या फिर जीत की गारंटी के चक्कर में राजनीतिक पार्टियां आम नागरिकों पर ‘उन्हीं पुराने नेताओं को ’ ही थोपने को आमादा हैं। समस्या ये भी है कि इस तकनीक को इस्तमाल करने वाली वही पार्टियां हैं जो अपने को औरों से अलग कराती हैं।


aap in uttarakhand

 

उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी ने विधानसभा चुनावों में हर सीट पर अपना उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है। लोगों को लगा कि जिस अन्ना आंदोलन से इस पार्टी का जन्म हुआ है उसकी मूल भावना के तहत ही उत्तराखंड में आप अपना राजनीतिक आधार तैयार करेगी। हालांकि अब लगता है कि आम आदमी पार्टी को उत्तराखंड में नेता नहीं मिल रहें हैं या फिर उन्हें विधानसभा में पहुंचने की इतनी जल्दी है कि वो उन पार्टियों के नेताओं को भी अपनी पार्टी में शामिल करने को तैयार हैं जिनसे वो खुद को अलग बताती रहीं हैं।

हाल ही दैनिक हिंदुस्तान समाचार पत्र में आप के उत्तराखंड प्रभारी दिनेश मोहनिया के हवाले से दावा किया गया कि राज्य के एक कैबिनेट मंत्री और चार अन्य विधायक जल्द आम आदमी पार्टी का दामन थाम सकते हैं। दिनेश मोहनिया के साथ हुई बातचीत के आधार पर लिखी गई इस खबर के अनुसार अगस्त तक आप बड़ा राजनीतिक खेल कर सकती है। इस खबर से जाहिर है कि आप शून्य से शिखर तक पहुंचने के लिए उन्हीं पारंपरिक रास्तों का इस्तमाल करने की तैयारी में जिन्हें अब से पहले की राजनीतिक पार्टियां प्रयोग करती रहीं हैं।

ये भी पढ़िए – सियासत: जुगरान का जुगाड़ AAP के लिए बड़ा दांव, BJP के लिए नुकसान तो है

ऐसे में सहज सवाल खड़ा होगा कि फिर आप औरों से अलग कैसे हुई और फिर उसे वोट क्यों किया जाए? हाल ही में आप ने बीजेपी के नेता रविंद्र जुगरान को अपने खेमे में मिलाकर अपनी रणनीतिक तैयारी को जाहिर भी कर दिया है। ऐसे में सवाल ये भी उठेगा कि क्या आप ने भी गंगा जल जैसे पवित्र जल से भरा हुआ कोई तालाब तैयार कर लिया है जिसमें नहा कर उनके विरोधी पार्टियों के नेता शुद्ध हो जाएंगे?

वैसे उत्तराखंड में इस तरह की राजनीति की शुरुआत ‘पार्टी विथ डिफरेंस’ के तौर पर खुद को स्थापित करने वाली बीजेपी ने की थी। हरीश रावत सरकार में शामिल कई कांग्रेसी नेताओं और अन्य नेताओं को बड़े पैमाने पर बीजेपी में शामिल करा लिया गया था। ये वही कांग्रेसी नेता थे जिनपर भाजपाई राजनीतिक आरोप लगाते थे। हालात ये हैं कि अब उन्हीं के साथ बीजेपी की गलबहियां हैं। अब सबका शुद्धीकरण हो चुका है।

कमोबेश यही हालात आप के भी लग रहें हैं। आप के नेता अपनी पार्टी को औरों से अलग दिखाने की कोशिश जरूर करते हैं लेकिन राजनीति के हमाम में लगता है सभी के साथ नंगे होने की तैयारी इनकी भी है। अब ऐसे में उत्तराखंड की जनता के सामने विधानसभा चुनावों में कोई स्वच्छ विकल्प हो इसकी उम्मीद कम ही लगती है।

इस आलेख पर आप हमें अपनी राय भेज सकते हैं। हमारा ईमेल पता है – khabardevbhoomi@gmail.com. आप हमारे फेसबुक पेज को लाइक कर हमारे साथ जुड़े रह सकते हैं। आपको सुझावों का इंतजार रहेगा।