उत्तराखंड में कुंभ कोविड जांच घोटाले में तीन आरोपियों के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी हुआ है। इन तीनों आरोपियों पर कुंभ में कोविड जांच के दौरान घोटाला करने का आरोप है। इनमें एक दंपति भी शामिल है और वो बीजेपी नेताओं का खासा करीबी रहा है।


haridwar kumbh covid test scam

उत्तराखंड में कुंभ कोविड जांच घोटाले में दो अधिकारियों को सस्पेंड किए जाने के बाद अब तीन और लोगों की गिरफ्तारी की तैयारी चल रही है। इनके नाम हैं शरत पंत, मल्लिका पंत और नवतेज नलवा।

शरत और मल्लिका पति पत्नी हैं। ये दोनों मैक्स कॉरपोरेट सर्विसेज के पार्टनर्स बताए जा रहें हैं। इसके साथ ही नवतेज नलवा नलवा लैब के मालिक हैं और ये लैब हिसार, हरियाणा में है।

शरत और मल्लिका पंत के बीजेपी नेताओं के साथ करीबी संबंध की खबरें आती रहीं हैं। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ शरत की फोटोग्राफ्स सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी हैं। शरत की सोशल मीडिया टाइमलाइन को देखने से लगता है कि वो बीजेपी की तरफ न सिर्फ झुकाव रखते हैं बल्कि बीजेपी में उनकी अच्छी पहुंच भी है। खबरें हैं कि इसी पहुंच का फायदा उठाकर कुंभ के दौरान कोरोना जांच की व्यवस्था का जिम्मा उनको दिया गया था। कुमाऊं के रहने वाले शरत फिलहाल नोएडा और दिल्ली से ऑपरेट करते हैं।

 

sharat pant and JP-Nadda

 

वहीं नवतेज नलवा की तलाश भी हो रही है। आशंका है कि हजारों फर्जी फोन नंबर्स के आधार पर फर्जी कोरोना जांच रिपोर्ट्स तैयार की गईं और करोड़ों का पेमेंट ले लिया गया। शुरुआती जांच में कई नंबरों की जांच की गई है इनमें से कई फर्जी निकले हैं।

एसआईटी ने इन तीनों के खिलाफ गैरजमानती वारंट हासिल किया है और इनकी गिरफ्तारी की कोशिशें जारी हैं। इस मामले में दो अधिकारी सस्पेंड हैं। इनमें कुंभ मेला स्वास्थ अधिकारी डॉ अर्जुन सेंगर और प्रभारी स्वास्थ मेला अधिकारी डॉ एनके त्यागी। हालांकि कई बड़े अधिकारियों को क्लीन चिट मिलने पर भी सवाल उठ रहें हैं क्योंकि कुंभ मेले में इतना बड़ा गोलमाल होता रहा और बड़े अधिकारियों को भनक तक नहीं मिली ऐसा कैसे हो सकता है?

ऐसे हुआ कुंभ कोविड जांच घोटाला

दरअसल हरिद्वार में आने वाले लोगों की कोविड जांच के लिए सरकार ने कई एजेंसियों को मेला प्रशासन के जरिए करार किया। इन सभी को कोविड एंटीजन टेस्ट किट के पैसे सरकार ने दिए और लोगों की जांच के लिए कहा। इसके साथ ही आरटीपीसीआर टेस्ट भी कराया गया। इसके पैसे भी सरकार ने दिए। आरोप है कि ये टेस्ट किए बिना ही निगेटिव रिपोर्ट शासन को दे दी गई। निगेटिव रिपोर्ट बनाने में बड़े पैमाने पर फर्जी मोबाइल नंबरों और आधार नंबरों की भी आशंका है।

हमलावर रही है कांग्रेस 

इस मसले पर कांग्रेस हमलावर रही है। कांग्रेस ने आरोप लगाए थे कि कुंभ में कोविड जांच में फर्जीवाड़ा करने की आरोपी एजेंसी के संस्थापक निदेशक शरत पंत और बीजेपी के नेताओं के खासे करीबी संबंध हैं। उनकी पत्नी मल्लिका पंत भी इसी कंपनी की निदेशक हैं। कांग्रेस नेताओं की माने तो इन्ही संबंधों के आधार पर इन्हें कुंभ में कोविड जांच का ठेका दिया गया और सरकार की शह पर फर्जी जांचों की पटकथा लिखी गई और सरकार चुप्पी ओढ़े रही। कांग्रेस नेताओं ने सोशल मीडिया पर शरत पंत और बीजेपी नेताओं की तस्वीरें भी दिखाईं हैं।

कहां थे बड़े अधिकारी

कुंभ के आयोजन के लिए सरकार की ओर से अफसरों की पूरी फौज तैनात की गई थी। कुंभ में कोरोना फैलने की पूरी आशंका थी लिहाजा कोविड जांच को अनिवार्य किया गया था। खुद नैनीताल हाईकोर्ट ने रोजाना 50000 जांचे कराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद जांच में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो गई ये अब भी बड़ा सवाल है। हैरानी इस बात की भी है कि कुंभ के दौरान हरिद्वार में बड़े पैमाने पर कोविड जांच का दावा किया जाता रहा लेकिन पॉजिटिविटी रेट नहीं बढ़ी। ये वो दौर था जब पूरा देश कोरोना की दूसरी लहर से लड़ रहा था। इसके बावजूद हरिद्वार में अधिकतर रिपोर्टें निगेटिव ही आती रहीं। इसे देखकर भी अधिकारियों को कोई शक नहीं हुआ। फिर ऐसे में बड़ा सवाल ये भी है कि क्या अधिकारी जानबूझ कर चुप रहे ताकि कुंभ पर कोरोना सुपर स्प्रेडर होने का धब्बा न लगे या फिर मेला प्रशासन और लैब्स की मिलीभगत से ये पूरा खेल होता रहा?


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