चमोली के तपोवन में आई भीषण आपदा में लापता एक पुलिस हेड कांस्टेबल के लापता होने को लेकर एक बेहद हैरान करने वाला वाक्या सामने आया है। लापता हेड कॉन्स्टेबल का शव इस आपदा में बहते हुए वहीं पहुंच गया जहां उसके पूर्वजों का अंतिम संस्कार होता रहा है।


 

हैरान करने वाली ये घटना तपोवन में आई आपदा के बाद सामने आई है। तपोवन में उत्तराखंड पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल मनोज चौधरी आपदा की चपेट में आ गए और लापता हो गए। घरवालों ने पुलिस को मनोज के लापता होने की जानकारी दी। पुलिस लोगों को तलाश ही रही थी।

इसी बीच मनोज चौधरी का शव आपदा वाली जगह से तकरीबन 100 किलोमीटर दूर अलकनंदा और पिंडर नदी के संगम पर स्थित कर्णप्रयाग घाट पर मिलने की सूचना आई। परिजनों ने शव मनोज का होने की शिनाख्त की। हालांकि आपदा स्थल से मनोज का शव महज एक दिन बाद ही 100 किलोमीटर दूर कर्णप्रयाग तक कैसे पहुंच गया ये भी हैरान करने वाला है। सबसे अधिक हैरानी इस बात की है कि जहां मनोज का शव मिला उसी के पास उनका पैतृक गांव कनौड़ी भी है।

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के अनुसार, जिस घाट पर मनोज का शव मिला वह उनके पुश्तैनी गांव के बेहद करीब है। हेड कॉन्स्टेबल मनोज का राजकीय सम्मान के साथ इसी घाट पर दाह संस्कार हुआ। मनोज के बड़े भाई अनिल चौधरी ने अंग्रेजी अखबार को बताया, ‘यह वही घाट है जहां हमारे सभी पूर्वजों को दफनाया जाता रहा है। यह हमारे पुश्तैनी गांव कनौड़ी से बहुत करीब है।’