सुना करते थे कि राजनीति किसी की नहीं होती। न देखे हों तो उत्तराखंड में प्रचंड बहुमत की सरकार को देखिए और समझिए कि वाकई में राजनीति किसी की नहीं होती।


BABY RANI AND GURMIT SINGH

2017 के मार्च महीने में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले त्रिवेंद्र सिंह रावत को क्या पता रहा होगा कि बहुमत की उनके सिर का दर्द बन जाएगा और एक दिन ऐसा आएगा कि बहुमत ही आपको आपकी कुर्सी से हटा देगा। खैर त्रिवेंद्र का चैप्टर अब बंद हो चुका है।

 

त्रिवेंद्र और तीरथ से होती हुई सत्ता अब पुष्कर सिंह धामी के हाथों में है। सरकार के बचे हुए दिनों में पुष्कर सिंह धामी के लिए सत्ता में वापसी का मुश्किल टारगेट दिया गया है।

 

हालांकि इस बीच पार्टी अपनी गोटियां सेट करने में लगी हुई है। बीजेपी नहीं चाहती है कि किसी भी तरह से उसे उत्तराखंड में हार का सामना करना पड़ा लिहाजा सरकार बनने तक की राह में हर पड़ाव मजबूत कर लेना चाहती है।

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राज्यपाल बेबी रानी मौर्या की विदाई भी इसी से जुड़ा कदम माना जा रहा है। ये दिलचस्प है कि बीजेपी ने शायद पहली बार न सिर्फ अपनी सरकार के मुख्यमंत्रियों के इस्तीफे लिए हैं बल्कि कहा जा रहा है कि बेबी रानी मौर्या को भी इस्तीफा देने के लिए कहा गया था।

 

इसके पीछे क्या वजह है ये दावे के साथ कहना मुश्किल है लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक दो अहम वजहें बताईं जा रहीं हैं। मसलन त्रिवेंद्र के साथ बेबी रानी मौर्या का तालमेल न बैठा पाना। चूंकि अब त्रिवेंद्र फिर एक बार सक्रिय हैं लिहाजा चर्चाएं हैं कि त्रिवेंद्र की सलाह पर बेबी रानी मौर्या को हटा दिया गया। वहीं एक चर्चा इस बात की भी है कि हाल ही में राज्यपाल ने उत्तराखंड में विश्वविद्यालयों में हो रही भर्तियों की जांच शुरु करा दी थी। इस जांच में राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री की मुश्किले बढ़ सकती थीं। फिर चुनावों में भी विपक्ष के पास एक मुद्दा मिल सकता था लिहाजा बेबी रानी मौर्या को हटा दिया गया।

 

वजह कुछ भी हो लेकिन चर्चाएं बताती हैं कि राज्यपाल बेबी रानी मौर्या का जाना बीजेपी की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।


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