निकाय चुनावों के परिणाम आने के बाद भले ही बीजेपी 7 में से 5 मेयर पदों पर जीत का जश्न मना रही हो लेकिन सभासद और सदस्यों की सीटें कम आने से बीजेपी के नेता सकते में भी हैं। बीजेपी के आला नेता इस हार पर मंथन में लगे हैं। वहीं सूत्रों की मानें तो शुरुआती मंथन में साफ हुआ है कि कुछ जगहों पर बीजेपी के अपने नेताओं ने ही हार की पटकथा लिखी।

कोटद्वार में पहली बार हो रहे मेयर पद के चुनावों में कांग्रेस को जीत मिली है। हैरानी ये है कि बीजेपी यहां तीसरे नंबर पर चली गई है। कोटद्वार से हरक सिंह रावत विधायक हैं और कैबिनेट मंत्री भी हैं। कोटद्वार में मेयर पद पर जीत दिलाने का जिम्मा भी उनके पास था लेकिन बीजेपी के तीसरे नंबर से संतोष करना पड़ा। अब खबरें आ रहीं हैं कि बीजेपी की हार में बीजेपी के ही अपनों ने अहम भूमिका निभाई है। वहीं हरक सिंह रावत भी अपने चहते उम्मीदवार को टिकट न दिए जाने से नाराज थे।

वहीं मसूरी नगर पालिका के लिए हुए चुनावों में भी बीजेपी का सूपड़ा साफ हो गया है। यहां निर्दलियों ने बाजी मारी है। बीजेपी का यहां एक भी सीट नहीं मिली। अपने खिसकते जनाधार से परेशान बीजेपी पर उसके ही विधायकों का गैरजिम्मेदाराना रवैया भारी पड़ रहा है। खबरें हैं कि यहां भी अपने पसंदीदा कैंडिडेट को टिकट न दिए जाने से मसूरी विधायक गणेश जोशी नाराज थे और इसका नतीजा सबके सामने है।

फिलहाल बीजेपी अपने विभीषणों को तलाश करने में लगी है। उसे उम्मीद है कि 2019 से पहले सब कुछ ठीक कर लिया जाएगा।

उत्तरकाशी में बीजेपी विधायकों की हवा फुस्स, निकाय चुनावों में पार्टी को मिली है हार