chamoli tunnel tapovan
photo source – fb of chamoli police

 

चमोली के तपोवन में आई आपदा के पांचवें दिन भी ऋषि गंगा बिजली परियोजना के लिए बनाई गई टनल को खोला नहीं जा सका है। टनल को खोलने की कोशिशें जारी हैं। मलबा इतना अधिक है कि बचाव कार्य बेहद मुश्किल हो गया है। वहीं इस बीच जैसे जैसे समय बीत रहा है टनल में फंसे लोगों के बचने की उम्मीद भी कम होती जा रही है।

 

ऋषिगंगा पॉवर प्रोजेक्ट के लिए बनाई गई बड़ी टनल को पूरी तरह से खोला नहीं जा सका है। हालांकि आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के साथ ही एनटीपीसी के इंजीनियर भी साइट पर लगे हुए हैं लेकिन टनल को खोलने में सहायता नहीं मिल पाई है। हालांकि चार दिनों की मशक्कत के बाद तकरीबन 150 मीटर से अधिक भीतर तक बचाव कर्मी पहुंच चुके हैं।

टनल में मलबा निकाल रही टीम को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। हालात ये हैं कि जितना मलबा निकाला जा रहा है लगभग उतना ही मलबा एक बार फिर पीछे से आकर भर जा रहा है। ऐसे में मलबा सफाई की रफ्तार धीमी हो गई है।

टनल के भीतर ड्रोन भी उड़ाया गया लेकिन उसे भी मलबे के पार निकलने की जगह नहीं मिल पाई। टनल में मलबा पूरी तरह से भरा हुआ है।

वहीं टनल में बचाव कार्य में हो रही देरी से टनल के भीतर फंसे लोगो के परिजनों में खासी नाराजगी है। कई लोगों ने वहां मौजूद अधिकारियों से अपनी नाराजगी जाहिर की है। लोग अपनों की सलामती की दुआएं मांग रहें हैं।

 

चमोली में आपदा में लापता हुए लोगों की तलाश जारी है। श्रीनगर में अलकनंदा की झील में नौसेना के विशेष मार्कोस गोताखोर टीम को उतारा गया है। माना जा रहा है कि अलकनंदा की तलहटी में शव फंसे हो सकते हैं। इसके साथ ही एसडीआरएफ की कई टीमें रेणी गांव से अलकनंदा की डाउनस्ट्रीम में हर मुमकिन जगह पर तलाश में लगी हैं। वहीं अब तक कुल 34 शव बरामद हो चुके हैं। इनमें से 10 की शिनाख्त हो चुकी है जबकि 24 शव अज्ञात हैं। पुलिस इन शवों का डीएनए और फोटोग्राफ सुरक्षित रख रही है। 96 घंटों के बाद इनका अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा। वहीं 170 लोग अब भी लापता हैं जिनका कोई पता नहीं चल पा रहा है।