तीर्थ पुरोहितों को कांग्रेसी बताकर बुरे फंसे CM त्रिवेंद्र, विरोध हुआ तेज

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trivendra singh rawat
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत राज्य के तीर्थ पुरोहितों को कांग्रेसी बताकर बुरे फंसे हैं। देवस्थानम बोर्ड के गठन को लेकर पहले से ही विरोध झेल रहे मुख्यमंत्री के लिए ये बयान मुसीबत भरा साबित हो सकता है। तीर्थ पुरोहित बड़े विरोध की रणनीति बना रहें हैं।

 

दरअसल हाल ही मुख्यमंत्री ने चारों धामों समेत पर्वतीय इलाकों को 51 मंदिरों की व्यवस्था के लिए देवस्थानम बोर्ड का गठन किया। इस बोर्ड के गठन को चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। इसके बाद से ही सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत बेहद उत्साह में हैं। हाईकोर्ट में मिली जीत के बाद सीएम अतिउत्साह में हैं। इसी बीच सरकार ने कुछ शर्तों के साथ चार धामों की यात्रा राज्य के बाहर के लोगों के लिए भी खोलने का ऐलान कर दिया। इसका राज्य के तीर्थ पुरोहितों ने विरोध किया। उनका तर्क है कि इससे राज्य के चारों धामों तक कोरोना का खतरा बढ़ सकता है। इसी बीच सीएम ने अतिउत्साह में मीडिया में एक बयान दे डाला। इस बयान में उन्होंने हैरान करने वाली बातें कहीं जिसकी उम्मीद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से नहीं की जा सकती थी। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चारों धामों की यात्रा बाहरी राज्यों के यात्रियों के लिए खोलने का विरोध करने वालों को कांग्रेसी बता दिया। सीएम ने कहा कि, मैं विरोध करने वालों को पिछले 20 सालों से जानता हूं, उन्हें नाम और चेहरे से पहचानता हूं। सीएम ने कहा कि जो विरोध कर रहें हैं वो तीर्थ पुरोहित नहीं, कांग्रेसी हैं।

 

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का ये बयान अब उनके गले की हड्डी बनता जा रहा है। तीर्थ पुरोहितों में इस बयान को लेकर गहरी नाराजगी है। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री के जरिए उन्हें कांग्रेसी बताए जाने से उन्हें गहरी ठेस पहुंची और वो कड़े विरोध की रणनीति तैयार कर रहें हैं। चारधाम तीर्थ पुरोहित हकहकूक धारी महापंचायत के अध्यक्ष कृष्ण कांत कोटियाल के मीडिया को दिए गए बयान में उन्होने सीएम से ही सीधा सवाल पूछा है। कोटियाल ने पूछा है कि, जब वे भाजपा के संगठन मंत्री थे तो मैं टिहरी में जिला महामंत्री था। कई सरस्वती विद्या मंदिरों का व्यवस्थापक रहा हूं तो मैं कांग्रेसी कैसे हो गया? कोटियाल ने कहा है कि चारों धामों के अधिकतर तीर्थ पुरोहित और अन्य मंदिरों के लोग संघ और भाजपा के हैं।

केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला व महामंत्री कुबेरनाथ पोस्ती ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों के हिसाब से बाहरी राज्यों के श्रद्धालुओं को चार धाम जाने की अनुमति देना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से स्थितियां सामान्य होने पर ही यात्रा संचालन की मांग की। सभा ने आंदोलन की भी चेतावनी दी।

वहीं, श्री बदरीश युवा पुरोहित संगठन ने भी चार धाम यात्रा शुरू करने के फैसले का विरोध किया। संगठन ने आक्रोश जताते हुए कहा, एक ओर सरकार यात्रा शुरू कर रही है, वहीं बदरीनाथ पंडा पुरोहित समाज को धाम स्थित अपने घरों तक जाने की अनुमति नहीं दे रही।

 

वहीं अब कांग्रेस को भी लगे हाथ सीएम को घेरने का मौका मिल गया है। कांग्रेस ने चार धाम देवस्थानम श्राइन बोर्ड के बहाने सरकार पर तीर्थ पुरोहितों की अनदेखी का आरोप लगाया है। कांग्रेस के ने कहा है कि देवस्थानम बोर्ड के गठन के बाद से ही तीर्थ पुरोहितों की हितों की अनदेखी हो रही है।

 

वहीं अब पार्टी के भीतर भी सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के बयान को लेकर नाराजगी की खबरें हैं। हालांकि फिलहाल खुलकर कोई बोलने को तैयार नहीं है लेकिन पार्टी का एक धड़ा सीएम के इस बयान को लेकर खासा नाराज है और इसके बारे में पार्टी आलाकमान को जानकारी देने की तैयारी है।

 

फिलहाल अपने बयान से सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत विवादों में घिरते नजर आ रहें हैं। ऐसे में सरकार को तीर्थ पुरोहितों की नाराजगी को कैसे दूर करती है।