उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा है कि उत्तराखंड में संवैधानिक संकट की स्थिती पैदा हो गई है। प्रीतम सिंह ने कहा है कि राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत विधायक नहीं हैं और उन्हें नौ सितंबर से पहले उपचुनाव लड़ना होगा।


pritam singh वहीं लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 151 कहती है कि जिस राज्य में आम चुनाव या विधानसभा चुनावों में एक वर्ष से कम का समय बचा हो वहां उपचुनाव नहीं होंगे।

 

प्रीतम सिंह ने कहा है कि, ऐसे में बीजेपी ने राज्य में संवैधानिक संकट खड़ा कर दिया है। अब राज्य में या तो राष्ट्रपति शासन लगेगा या फिर मौजूदा विधायकों में से ही किसी को मुख्यमंत्री का पद दिया जा सकता है।

 

हालांकि प्रीतम सिंह ने कहा है कि ये पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग के जिम्मे है और उसे ही तय करना है लेकिन लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत राज्य में वर्तमान परिस्थितियों में कोई चुनाव नहीं हो सकता है। सीएम रावत छह माह के भीतर विधानसभा का सदस्य बनने का अवसर गंवा चुके हैं। ये भी पढ़िए – BJP विधायक प्रदीप बत्रा का चालान काटने वाले दरोगा का तबादला कर दिया गया है

 

प्रीतम सिंह ने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए हैं। प्रीतम सिंह ने कहा है कि चुनाव आयोग सरकार की कठपुतली है। नियमों के तहत चला जाए तो उपचुनाव नहीं होंगे हालांकि अगर सरकार के इशारों में पर चले तो कुछ भी हो सकता है।

क्या है पेंच

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि को समझना जरूरी है। दरअसल नौ मार्च को त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाकर तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। तीरथ सिंह रावत विधायक दल के सदस्य ही नहीं हैं। वो पौड़ी संसदीय सीट से जीतकर सांसद बने हैं। फिर राज्य का मुख्यमंत्री विधायक दल का नेता होता और उसे संवैधानिक रूप से विधानसभा का सदस्य होना चाहिए। नियमों के अनुसार तीरथ सिंह रावत को विधानमंडल का नेता चुने जाने के छह महीने के भीतर यानी नौ सितंबर तक विधानसभा का सदस्य बनना है। ऐसे में उनको किसी सीट से उपचुनाव लड़ना पड़ेगा और जीत दर्ज करनी पड़ेगी।

वहीं राज्य में अगले विधानसभा चुनावों की तारीख भी करीब आ गई है। फरवरी 2022 या फिर मार्च के शुरुआती हफ्ते तक विधानसभा चुनाव संपन्न कराकर परिणाम घोषित करने होंगे। 17 -18 मार्च तक नई सरकार का गठन होना है। ऐसे में अगले वर्ष होने वाले चुनावों में एक वर्ष से कम समय बचा है। कांग्रेस का बयान है कि नियमों के तहत जिस राज्य में विधानसभा चुनावों में एक साल से कम समय हो तो वहां कोई उपचुनाव नहीं होगा।

यहां एक पेंच और फंस रहा है। अगर तीरथ सिंह रावत विधानसभा का चुनाव लड़ते हैं और जीत कर आते हैं तो पौड़ी की संसदीय सीट खाली हो जाएगी। इसके बाद अगर विधानसभा चुनावों में लंबा समय बचता है तो चुनाव आयोग को उससे पहले ही पौड़ी सीट पर लोकसभा का उपचुनाव कराना होगा। हालांकि माना यही जा रहा है कि पौड़ी लोकसभा का उपचुनाव, विधानसभा के चुनावों के साथ ही होगा।


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