उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री दावे तो बहुत करते रहे लेकिन पिछले पांच सालों में वो राज्य को फीस एक्ट नहीं दे पाए। हर बार मंत्री अरविंद पांडेय बस दिलासा देते रहे। अब कहा जा रहा है कि नई शिक्षा नीति में ही फीस नियंत्रण के प्रावधान हैं।


प्राइमरी स्कूल schools openingउत्तराखंड में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए राज्य के लोग पिछले काफी वक्त से स्कूली फीस एक्ट की मांग कर रहे थे। पिछले पांच सालों में कई बार ये मांग उठी। हर बार शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय यही दिलासा देते रहे कि जल्द ही राज्य में फीस एक्ट लागू किया जाएगा। फीस एक्ट लागू करने के लिए कई नागरिक संगठनों ने काफी दिनों तक संघर्ष भी किया।

हालांकि अब जब इस सरकार का कार्यकाल खत्म होने वाला है तब तक ये एक्ट नहीं आ सका है। वहीं शिक्षा विभाग के मुताबिक देश में आई नई शिक्षा नीति में ही फीस एक्ट का प्रावधान है। लिहाजा अब फीस एक्ट अलग से लाने की जरूरत नहीं है। अधिकारी बताते हैं कि जल्द ही शिक्षा नीति को पूर्ण रूप से लागू किया जाएगा और इसी के साथ फीस पर भी नियंत्रण हो जाएगा।

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अब क्या करेगी सरकार 

बताया जा रहा है कि फीस एक्ट को लेकर सरकार की नीति में अब बदलाव हो चुका है। राज्य सरकार नई शिक्षा नीति के तहत राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण(SSSA) का गठन करेगी। इस प्राधिकरण के दाएरे में प्राइवेट स्कूलों को रखा जाएगा। यही प्राधिकरण स्कूलों के मानकों की निगरानी करेगा। इसी के तहत स्कूलों की फीस और अन्य मानकों को नियंत्रित किया जाएगा।

किसी की नहीं हुई हिम्मत

उत्तराखंड में फीस एक्ट की मांग बहुत पुरानी है। निजी स्कूलों की मनमानी को रोकने के लिए नागरिक संगठन लंबे समय से फीस एक्ट लाने की मांग करते रहें हैं। हालांकि प्राइवेट स्कूलों की लॉबी के आगे उत्तराखंड की सरकारें अब तक नतमस्तक ही नजर आईं हैं। सूत्रों की माने तो प्राइवेट स्कूलों से मिलने वाला चुनावी चंदा राजनीतिक दलों के कदम रोकता है। 2017 से पहले की हरीश रावत सरकार में भी फीस एक्ट को लेकर खूब कवायद हुई। हरीश रावत सरकार ने किसी तरह एक्ट का मसौदा तो तैयार किया लेकिन उसे लागू करने की हिम्मत नहीं दिखा पाई। इसके बाद राज्य में बीजेपी सरकार बनी तो एक बार फिर से एक्ट को लेकर उम्मीद जगी लेकिन पिछले पांच सालों में ये सरकार भी स्कूल लॉबी की नकेल कसने की हिम्मत नहीं दिखा सकी।


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