भारत अपना 75वां जश्न ए आजादी मना रहा है। आइए आपको बताते हैं आजादी के जश्न से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें। पहली बार लालकिले पर फहरा तिरंगा तो उस समय कहां थे महात्मा गांधी।


jawahar lal nehru on red fortयह सब जानते हैं कि हर स्वतंत्रता दिवस पर देश के प्रधानमंत्री ‘लाल किले’ की प्राचीर पर झंडा फहराते हैं। लेकिन यह कुछ लोग ही जानते होंगे कि 15 अगस्त 1947 को ऐसा नहीं हुआ था। लोकसभा सचिवालय के एक शोध पत्र के अनुसार, देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 16 अगस्त 1947 को लाल किले पर झंडा फहराया था।

भारत आजाद हुआ था, उस समय देश के पास अपना राष्ट्रगान नहीं था। वैसे तो रवींद्रनाथ टैगोर ने 1911 में ही ‘जन गण मन’ लिखा था, मगर 1950 में इसको राष्ट्रगान के रूप में शामिल किया गया।

महात्मा गांधी ने भारत के स्वाधीनता आंदोलन का नेतृत्व किया था। मगर जब 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली तो वे इस जश्न में शामिल नहीं हुए थे, क्योंकि गांधी जी उस दिन बंगाल के नोआखली में सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए अनशन कर रहे थे।

15 अगस्त को भारत और पाकिस्तान अलग अलग देश बन गए थे, मगर उस समय दोनों के बीच सीमा रेखा का निर्धारण नहीं हुआ था। इस पर फैसला 17 अगस्त को रेडक्लिफ लाइन की घोषणा से हुआ था, जो भारत और पाकिस्तान की सीमाओं को निर्धारित करती थी।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में पंडितों और ज्‍योतिषियों ने 15 अगस्‍त 1947 का दिन अशुभ और अमंगलकारी बताया था। इसी वजह से अभिजीत मुहूर्त में आजादी का शंखनाद बजा था।

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14-15 अगस्त की रात में देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू को लॉर्ड माउंटबेटन ने प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई थी। इसके बाद नेहरू ने ऐतिहासिक भाषण दिया था।

लार्ड माउंटबेटन ने ही निजी तौर पर भारत की स्‍वतंत्रता के लिए 15 अगस्‍त का दिन तय करके रखा था, क्‍योंकि इस दिन को वह अपने कार्यकाल के लिए ‘बेहद सौभाग्‍यशाली’ मानते थे।

देश 15 अगस्त को आजादी का जश्न मनाता है, लेकिन इससे एक दिन पहले यानी 14 अगस्त को भारत का विभाजन हुआ। 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान और 15 अगस्त 1947 को भारत को एक पृथक राष्ट्र घोषित किया गया था।

अंग्रेजों को जून 1948 तक भारत को छोड़ना था। मगर बिगड़ते और बेकाबू हालातों की वजह से लार्ड माउंटबेटन विवश हो गए थे और उन्हें इसके चलते स्‍वतंत्रता का दिन 1948 के बदले 1947 में एक साल पहले घोषित करना पड़ा था।

लाल किले को जंग-ए-आजादी का गवाह माना जाता है। भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजादी मिलने के बाद नेहरू ने किले से पहली बार ध्वजा रोहण किया। तभी से हर साल यहां स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश के प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले पर झंडा फहराने की परंपरा है।


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