पहाड़ से पलायन कर दिल्ली गया था दिलबर, लाश भी वापस न आ सकी

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दिल्ली हिंसा में बहुत तबाही हुई। इस हिंसा में बहुत लोगों की जान गयी। राजधानी में हुई इस भयावह हिंसा में उत्तराखंड के पौड़ी जिले के थाना क्षेत्र पैठाणी के ढाईज्यूली पट्टी स्थित रोखड़ा गांव निवासी दिलबर सिंह की दिल्ली दंगे में मौत हो गई थी।

दिलबर सिर्फ 20 साल का था ! अपने गरीब परिवार का हाथ बंटाने के लिए 6 महीने पहले दिलबर नेगी उत्तराखंड के एक गांव से दिल्ली पहुंचा। इस खुशमिजाज युवक का सपना फौज में जाने का था। सेना की भर्ती परीक्षा में वह शामिल भी हुआ था।

होली के लिए वह अपने घर पहाड़ जाने की सोच रहा था, लेकिन 24 फरवरी को नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में दंगाइयों ने दिलबर के साथ-साथ उसके ख्वाबों को भी जला डाला। जिस क्रूरता से उसकी हत्या की गयी कि उसके मां-बाप शायद जिंदगी भर उसके इस खौफनाक दर्द को महसूस करेंगे। बीमार पिता और रोती मां अपने बच्चे का शरीर तक नहीं देख पाई। ब़ॉड़ी इतनी बुरी हालत में था कि उसे घर भी नहीं लाया जा सकता था। दिल्ली में ही अंतिम संस्कार करना पड़ा।




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