7 दिन में बाबा रामदेव के बदले सुर, कोरोना की दवा पर अब ये दिया बयान

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23 जून को कोरोना की दवा ‘कोरोनिल’ पेश करने वाले बाबा रामदेव अब अपने दावे से पलट गए हैं। बाबा रामदेव ने अब अपनी दवा को कोरोना की दवा बताने से इंकार कर दिया है हालांकि इसके बावजूद वो ये दावा जरूर कर रहें हैं कि उनकी दवा के सेवन से सात दिनों में कोरोनो पॉजिटिव लोग कोरोना निगेटिव हो गए है। उन्होंने दावा किया है कि उन्होंने अपनी रिसर्च से जुड़ी पूरी रिपोर्ट भारत सरकार के आयुष मंत्रालय को सौंप दी है। ये बातें उन्होंने हरिद्वार में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहीं हैं।

23 जून को कोरोना की दवा बनाने का दावा कर विवादों के घेरे में आए बाबा रामदेव 1 जुलाई आते आते अपने दावे पर किंतु – परंतु की स्थिती में आ गए हैं। विवादों के बाद बाबा रामदेव ने कई सवालों के गोलमोल जवाब दिए। बाबा रामदेव ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया है कि उनकी दवा के खिलाफ ड्रग माफिया और बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने साजिश रची। बाबा ने आरोप लगाया है कि कोरोनिल (CORONIL) के आने से उनके विरोधियों को मिर्ची लगी और उनके ऊपर आतंकियों और देशद्रोहियों की तरह FIR दर्ज करा दी।

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बाबा रामदेव ने कहा कि पतंजलि ने कोरोनिल पर कंट्रोल डबल ब्लाइंड क्लीनिकल ट्रायल किया है, उसमें तीन दिन में 69 फीसदी और 7 दिन में 100 फीसदी पेशेंट नेगेटिव हो गए। उसका पूरा डाटा हमने आयुष मंत्रालय को दे दिया। सभी अप्रूवल हमने आयुष मंत्रालय को सब्मिट कर दिए गए हैं।

न्यूज चैनल AAJTAK के साथ बातचीत में बाबा रामदेव ने कहा कि कोरोनिल विवाद शब्दों का मायाजाल है, आयुष मंत्रालय ने कोरोनिल को कोरोना मैनेजमेंट की दिशा में अच्छा प्रयास बताया है. मंत्रालय के इस रुख पर बाबा रामदेव ने कहा कि कोरोना मैनेजमेंट की जगह कोरोना पेशेंट ठीक हुए, ये भी बोल सकते हैं, लेकिन क्योर शब्द में दिक्कत थी, अब मैं क्योर शब्द नहीं बोल रहा हूं, लेकिन ये दवा पूरे देश में मिलेगी.

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गौरतलब है कि बाबा रामदेव ने NIMS यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर कोरोना की दवा ‘CORONIL’ बनाने के दावा किया था। इसके बाद बाबा रामदेव के दावे पर सवाल उठ खड़े हुए थे। बाबा को केंद्रीय सरकार के साथ साथ उत्तराखंड के आयुष विभाग ने नोटिस भेज दिया था। राजस्थान सरकार ने बाबा के खिलाफ कार्रवाई शुरु कर दी है। वहीं विवाद के बाद NIMS यूनिवर्सिटी ने भी कोरोना की दवा पर रिसर्च से पल्ला झाड़ लिया था।




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