फ्रांस से 5 राफेल विमानों ने भरी उड़ान, सेना की बढ़ाएंगे ताकत

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बहुप्रतीक्षित राफेल विमानों का पहला जत्था फ्रांस से भारत के लिए रवाना हो चुका है। फ्रांस में भारतीय दूतावास ने इस घटना को भारत-फ्रांस के रक्षा सहयोग को मजबूत और विकसित करने में एक “नया मील का पत्थर” बताया। आपको बता दें कि 5 राफेल विमानों का यह जत्था बुधवार को अंबाला एयर बेस पहुंचेगा। भारत ने राफेल में अपनी जरूरत के हिसाब से कुछ बदलाव भी किए हैं। इसमें इजरायल के हेलमेट माउंट डिस्प्ले के साथ ही रडार वार्निग रिसीवर, लो बैंड जैमर, दस घंटे की फ्लाइट डाटा रिकार्डिग और ट्रैकिंग सिस्टम समेत कई अन्य सुविधाएं हैं।

राफेल विमान को देखने के लिए भारतीय राजदूत जावेद अशरफ वहां मौजूद थे।उन्होंने भारतीय पायलटों से भी मुलाकात की और उन्हें दुनिया के सबसे उन्नत और शक्तिशाली लड़ाकू विमान उड़ाने वाले पहले भारतीय वायुसेना के फाइटर पायलट बनने के लिए बधाई दी और उनकी सफलता की कामना की।

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भारतीय वायुसेना के फाइटर पायलट 7000 किलोमीटर की हवाई दूरी तय करके बुधवार को अंबाला एयरबेस पहुंचेंगे। राफेल से भारतीय वायुसेना की मौजूदा ताकत में जबर्दस्त इजाफा होगा क्योंकि पांचवी जेनरेशन के इस लड़ाकू जेट की मारक क्षमता जैसा लड़ाकू विमान चीन और पाकिस्तान के पास भी नहीं हैं।

फ्रांस से रवाना हुए इन विमानों को संयुक्त अरब अमीरात में एक एयरबेस पर उतारा जाएगा और फ्रांस के टैंकर विमान से ईंधन भरा जाएगा। इसके बाद विमान अंबाला एयरबेस के लिए आगे का सफर तय करेंगे। फ्रांस से राफेल विमानों को 17 गोल्डेन एरोज कमांडिंग आफीसर के पायलट लेकर आ रहे हैं। सभी पायलटों को फ्रांसीसी डोसॉल्ट एविएशन कंपनी द्वारा प्रशिक्षित किया गया है। इन्‍हें अंबाला के एयरफोर्स स्टेशन पर 29 जुलाई को वायुसेना में शामिल किया जाएगा।

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आपको बता दें कि भारत ने साल 2016 में फ्रांस से इन विमानों का सौदा 60 हजार करोड़ रुपये में किया था। यह अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा है। मौजूदा वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया तब उपसेना प्रमुख थे और उन्होंने इस सौदे में भारतीय दल का नेतृत्व किया था।




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