राहुल गांधी क्यों कह रहें हैं कि आरोग्य सेतु ऐप एक ‘अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली’ है?

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जिस आरोग्य सेतु के सहारे भारत की मोदी सरकार देश में कोरोना की महामारी के खिलाफ लड़ाई के आसान होने का दावा कर रही है। वही आरोग्य सेतु मोबाइल ऐप अब विवादों के घेरे में है। कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसे मोदी सरकार की ‘अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली’ करार दिया है।

राहुल गांधी ने कहा है कि, ‘आरोग्य सेतु ऐप एक अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली है जिससे निजता एवं डेटा सुरक्षा को गंभीर चिंता पैदा हो रही है।’

राहुल गांधी ने ये आरोप एक ट्वीट के जरिए लगाए हैं। राहुल गांधी ने कहा है कि, ‘प्रोद्योगिकी हमें सुरक्षित रहने में मदद कर सकती है।, लेकिन नागरिकों की सहमति के बिना उन पर नजर रखने का डर नहीं होना चाहिए।’

ऐसा नहीं है कि कांग्रेस ने आरोग्य सेतु ऐप पर पहली बार सवाल खड़े किए हैं। इसके पहले मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला भी इस पर सवाल उठा चुके हैं।

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गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण को ट्रेस करने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने आरोग्य सेतु ऐप की शुरुआत की है। इस ऐप को मोबाइल में डाउनलोड करने के लिए खुद प्रधानमंत्री कई बार नागरिकों से अपील कर चुके हैं। केंद्र सरकार के इस मोबाइल ऐप पर शुरू से ही सवाल उठते रहें हैं। हालात ये हुए कि खुद केंद्र में तैनात अधिकारियों को सामने आकर सफाई देनी पड़ी थी।


 इस मोबाइल ऐप में यूजर की मोबाइल लोकेशन और ब्लूटुथ हमेशा ऑन रहती है। इससे उसके मुवमेंट का पता लगता है। अधिकारियों का दावा है कि ये ऐप आपके आसपास किसी कोरोना संक्रमित के बारे में एलर्ट देगा। हालांकि इस दावे के पीछे शर्त ये है कि संक्रमित व्यक्ति के फोन में भी ये ऐप होना चाहिए और उसके जरिए ऐप में सही जानकारियां भरी गईं हों।

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केंद्र सरकार ने सार्वजनिक और निजी दोनों ही तरह के संस्थानों के कर्मचारियों के लिए इस ऐप का इस्तमाल अनिवार्य कर दिया है। इसके बाद ही राहुल गांधी हमलावर हो गए हैं। केंद्र ने कहा है कि इस ऐप के जरिए कोविड – 19 के मरीजों का पता लगाया जा सकता है। आरोग्य सेतु मोबाइल ऐप को नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) ने विकसित किया है।

हालांकि राहुल गांधी के सवालों का केंद्रीय संचार और सूचना प्रोद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जवाब दिया है। रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट कर कहा है कि, ‘श्रीमान गांधी, वक्त आ गया है कि आप अपना ट्वीट ऐसे लोगों को आउटसोर्स करना बंद कर दें, जिनको भारत की समझ नहीं है।’ उन्होंने कहा कि इस ऐप की दुनिया भी में सराहना की जा रही है जिसे सरकार ने कोरोना वायरस से लड़ाई में एक महत्वपूर्ण हथियार बताया है।

रविशंकर प्रसाद यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा है कि, ‘हर दिन एक नया झूठ। आरोग्य सेतु ऐप शक्तिशाली सहयोगी है जो लोगों की सुरक्षा करता है। इसमें डाटा सुरक्षा की ठोस व्यवस्था है। जो लोग जीवन भर निगरानी करने में जुटे रहे, वे नहीं समझ सकते कि प्रौद्योगिकी का अच्छे कार्यों में उपयोग किया जा सकता है।’

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हालांकि आरोग्य सेतु ऐप अपनी लॉंचिंग से ही सवालों के घेरे में रहा है। इंटरनेट फ्रीडम फॉउंडेशन भी इस ऐप की गोपनियता शर्तों पर संदेह जता चुका है। शुुरुआती दौर में कहा गया कि ये अपने यूजर्स की बातचीत को भी ट्रैक कर सकता है।

चार मई से शुरु हो रहे तीसरे चरण के लॉकडाउन के दौरान लागू होने जा रहे नए दिशानिर्देशों के मुताबिक आरोग्य सेतु ऐप अब सभी सरकारी और निजी संस्थानों के कर्मचारियों के लिए अनिवार्य होगा।

 




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