भारत में क्यों सामने आ रहे हैं कोरोना के नए मामले? अब भी नहीं माने तो क्या होगा

534

भारत में कोरोना के नए मामले सामने आने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। भारत में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। भारत में ये पोस्ट लिखे जाने तक 649 लोग कोरोना से पीड़ित करार दिए जा चुके हैं।

कोरोना से बचाव के लिए पूरे देश में लॉकडाउन किया गया है। इस लॉकडाउन के पहले दिन 101 कोरोना पॉजिटिव केस रिपोर्ट किए गए। ये देश के अलग अलग इलाकों से आए। एक ही दिन में कोरोना के 101 मरीजों के पाए जाने से स्वास्थय एजेसिंयां सकते में हैं। गोवा में आज तीन नए मामले सामने आए हैं। वहीं दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिक में तैनात एक डाक्टर और उनके परिवार के दो अन्य लोगों में भी कोरोना पाया गया है। इस केस के सामने आने के बाद स्वास्थय एजेंसियां अब क्लीनिक में आने वाले हर शख्स के बारे में पता कर रहीं हैं। साथ ही ऐलान कर रहीं हैं कि इस क्लीनिक में आए लोग खुद ही सामने आएं।

यह भी पढ़े :   यूपी इनकाउंटर। ADG का बयान, पुलिस से चूक हुई

जाहिर है कि कोरोना अब धीरे धीरे कम्यूनिटी ट्रांसमिशन की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में बेहद सतर्कता बरतनी होगी। हालांकि WHO ने कहा है कि सिर्फ Lock down से काम नहीं चलेगा। संक्रमित लोगों की पहचान करनी होगी और उनका इलाज करना होगा। तभी कोरोना को हराया जा सकता है। इसके साथ ही कोरोना के वायरस को मारना भी जरूरी है।

ये भी पढ़िए – महाभारत का युद्ध 18 दिन चला, कोरोना से युद्ध 21 दिन चलेगा – पीएम मोदी

कोरोना के भारत में महामारी के कगार पर पहुंचने की आशंका इस लिए भी बलवती हो रही है क्योंकि पिछले कुछ दिनों में कई ऐसे मामले रिपोर्ट किए गए जिनकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं थी। उनतक कोरोना कैसे पहुंचा ये बड़ा सवाल है। इसके साथ ही लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में बड़ी संख्या में दिहाड़ी मजदूरों और अन्य लोगों का बड़े शहरों से बिहार और यूपी के अपने गांवों में लौटना जारी है। ये लोग पैदल तो कहीं गाड़ियों में ठूंसठूंस कर अपने गंतव्य की ओर निकल रहें हैं। ऐसे में कोरोना के गांवों तक पहुंचने का खतरा बढ़ रहा है।

यह भी पढ़े :   उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा, फीस के लिए दबाव न बनाए स्कूल प्रबंधन

भारत के गांवों में स्वास्थय सेवाओं की कमी और लोगों का जागरुक न होना भी इसकी एक बड़ी वजह बन सकता है। इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों के जरिए लोगों को घरों तक आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति करने की समुचित व्यवस्था नहीं करा पाईं हैं ऐसे में लॉकडाउन के दौरान सुबह 7 से 10 तक मिलने वाली छूट के दौरान लोगों की भारी भीड़ सड़कों और मंडियों में दिख रही है। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है।

 




LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here