गर्त में इकोनॉमी।। पैसों के लिए RBI के दरवाजे पर फिर से मोदी सरकार!

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देश के न्यूज चैनलों में सीएए और जेएनयू हिंसा का कंटेट भरा पड़ा है। एंकर चीख चीख कर इन्हीं मुद्दों के आसपास मंडरा रहें हैं और दूसरे छोर पर देश की अर्थव्यवस्था गोते लगाने के नए कीर्तिमान बना रही है। वैसे खबर ये है कि सरकार के पास पैसों की कमी हो गई है लिहाजा एक बार फिर मोदी सरकार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के दरवाजे पर झोली फैलाए पहुंच सकती है। न्यूज एजेंसी रायटर्स के मुताबिक मोदी सरकार एक बार फिर आरबीआई का दरवाजा खटखटाने जा रही है। केंद्र सरकार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से 45 हजार करोड़ की मदद मांग सकती है।

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आर्थिक विकास दर 11 साल के न्यूनतम स्तर 5 फीसदी पर पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। सरकार का रेवेन्यू तेजी से घट रहा है। अगस्त के महीने में आरबीआई ने सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपए दिए थे। इनमें से चालू वित्तीय वर्ष के लिए 1.48 लाख रुपए दिए गए थे। इसके लिए 1,23,414 करोड़ रुपए जारी भी किए जा चुके हैं। ये रकम एक साल में ट्रांसफर की गई सबसे बड़ी रकम है। आरबीआई ने इसके साथ अलग से 52.637 करोड़ रुपए भी ट्रांसफर किए।

मौजूदा दौर बेहद मुश्किल

रायटर्स की माने तो देश के लिए मौजूदा वित्तीय वर्ष बेहद मुश्किल है। आर्थिक सुस्ती के चलते विकास दर 11 साल में सबसे निचले स्तर पर चली गई है। ऐसे में सरकार के पास आरबीआई से मदद मांगने के अलावा कोई चारा नहीं है। सूत्रों की माने तो सरकार को तत्काल 35 से 45 हजार करोड़ रुपए की जरूरत है।

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घटती कमाई, नीति काम न आई

सरकार की कमाई लगातार घटती जा रही है। 2019 -20 में 19.6 लाख करोड़ रुपए की कमाई के एवज में उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं हुई। ऊपर से कॉरपोरेट टैक्स में कटौती करनी पड़ी जिससे 1.5 लाख करोड़ रुपए का बोझ देश पर पड़ा वो अलग। मोदी सरकार को जीएसटी से भी कमाई नहीं हो रही है। वैसे रिज़र्व बैंक के पास 4 तरह के खाते होते हैं। RBI के 2017-18 के आंकड़ों के मुताबिक उसके पास करीब 9 लाख 60 हजार करोड़ रुपए का रिज़र्व फंड है।




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