निर्भया के दोषियों को नहीं था कोई पछतावा, क्या हुआ था फांसी से पहले

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निर्भया के दोषियों को 20 मार्च की सुबह फांसी दे दी गई। निर्भया को फांसी देने वाले जल्लाद पवन की माने तो निर्भया के दोषियों को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं था। निर्भया के चारों दोषियों को फांसी की सुबह हाथ बांधकर फांसी घर में लाया गया।

पवन जल्लाद की माने तो फांसी घर में बोलना मना होता है और सभी काम इशारों में होते हैं। दोषियों को पांच पांच बंदीरक्षक अपने साथ लेकर आए थे। हर एक दोषी के साथ पांच पांच बंदीरक्षक मौजूद थे। एक एक कर इन सभी को फांसी घर के प्लेटफार्म पर लाया गया। इसके बाद इनके सिर को कपड़े से ढंक दिया गया। कपड़े से ढकने के बाद इनके गले में पहले से तैयार फंदा डाल दिया गया। इसके बाद जेल अधिकारियों के निर्देश पर जल्लाद पवन ने लीवर खींच दिया और इस तरह निर्भया का इंसाफ पूरा हुआ।

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आखिरी समय में निर्भया के दोषियों को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं था हालांकि मौत की सजा के चलते वो परेशान जरूर थे। 17 मार्च को जल्लाद पवन ने फांसी का ट्रायल भी किया था। इसके बाद दूध और मक्खन से फांसी के फंदे को मुलायम भी बनाया गया था।

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