अमेरिका में शवों को दफनाने की जगह नहीं मिल रही है

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खुद को दुनिया का सबसे ताकतवर देश बताने वाला अमेरिका अब कोरोना के आगे लाचार हो चुका है। हालात ये हैं कि कोरोना के संक्रमण से अमेरिका में मरने वालों लोगों की लाशों को दफनाने के लिए जगह की कमी महसूस होने लगी है। अमेरिका को शवों को दफनाने के लिए नई जगहें तलाश करनी पड़ी हैं।

कोरोना के संक्रमण का सबसे अधिक सामना करने वाले देशों में से एक अमेरिका भी हैं। यहां की सरकार की नीतियों के चलते कोरोना का संक्रमण बहुत तेजी और व्यापक इलाके में फैला है। अमेरिका के कई प्रांत कोरोना की चपेट में हैं।

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न्यूयार्क के अस्पतालों में रोजाना ही 700 से 800 लोगों की मौतें रिपोर्ट की जा रहीं हैं। हालात ये हैं कि अस्पतालों में शवों को रखने की जगह नहीं मिल रही है। चूंकि मृतकों के परिजनों का इंतजार भी किया जा रहा है इसलिए शवों को एक हफ्ते तक रखने की व्यवस्था करनी पड़ रही है। ऐसे में अस्पतालों में शवों के लिए जगह नहीं मिल पा रही लिहाजा बड़े एअरकूल्ड ट्रकों में इन शवों को रखा जा रहा है।

न्यूयार्क में शवों को दफनाने के लिए जिन कब्रगाहों का इस्तमाल होता है अब उनमें जगह नहीं बची है। लगभग दस हजार मौतों के बाद अब अमेरिका ने हार्ट आईलैंड में सामूहिक कब्र बनाने का फैसला लिया। यहां एक साथ कई लोगों को दफनाया जा रहा है। शव दफनाने का काम करने वाली कंपनी के मुताबिक उसे रोजाना इतने शव मिल रहें हैं कि उन्हें एक दिन भी रखा नहीं जा सकता। अगर वो ऐसा करते हैं तो शवों का ढेर लग जाएगा।

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हालांकि इस आईलैंड पर पहले भी लावारिस शव दफनाए जाते रहें हैं लेकिन हफ्ते में सिर्फ एक दिन। लेकिन अब हफ्ते के पांच दिन यहां शव दफनाए जा रहें हैं.

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