भारत में कोरोना बेकाबू, 24 घंटे में 57 हजार से अधिक मामले, मेन स्ट्रीम मीडिया भी अब चुप

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केंद्र सरकार के तमाम दावों के बीच भारत में कोरोना बेकाबू होता दिख रहा है। कोरोना के लगातार बढ़ते मामले इस बात की गवाही दे रहें हैं। हालांकि मेन स्ट्रीम मीडिया और खासतौर पर टीवी चैनलों ने कोरोना के बढ़ते मामलों पर चर्चा करनी छोड़ दी है। शनिवार को सुबह आए आंकड़ों के मुताबिक देश में पिछले 24 घंटों के बीच 57,117 नए मामले मिले हैं। ये अब तक एक दिन में सामने आए रिकॉर्ड मामले हैं। पूरे भारत में कोरोना के मामले 16 लाख से ऊपर पहुंच चुके हैं और कोरोना पर कब तक लगाम लग पाएगी ये बता पाने में सरकार फिलहाल असमर्थ है। भारत में कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। अब तक 36,511 कोरोना संक्रमित लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना से रिकवर होने वालों की संख्या 10 लाख 94 हजार 374 है। हैरानी की बात ये है कि कोरोना जिन इलाकों में बेहद कम हो चुका था वहां भी फिर से फैल रहा है। केरल ऐसा ही एक राज्य है।

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शनिवार को सुबह जारी हुए आधिकारिक आंकड़ों ने कोरोना को लेकर देश के आम लोगों की चिंता को बढ़ा दिया है। भारत में कोरोना का पहला मामला आने के तकरीबन छह महीने बाद और कोरोना को रोकने के लिए किए गए पहले लॉकडाउन के शुरु होने के तकरीबन चार महीने बाद भी देश की सरकार कोरोना से लड़ने और नए मामलों को रोकने की कोई ठोस नीति नहीं तैयार कर पाई है। राष्ट्रीय स्तर पर कोरोना के लड़ने की ठोस नीति के अभाव में राज्यों को कोविड – 19 की महामारी से खुद ही लड़ना पड़ रहा है। केंद्र सरकार की भूमिका सिर्फ गाईडलाइन जारी करने तक ही रह गई लगती है। दुनिया के कई बड़ें देशों ने इस महामारी से सफलता पूर्वक लड़ाई लड़ी। जिस देश से कोरोना फैला यानी चीन ने इस महामारी पर काबू पाया और मौजूदा दौर में अपने देश से कोरोना को लगभग खत्म कर दिया है।

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भारत में कोरोना की स्थिती
चीन में कोरोना की रफ्तार थम गई है

हालात ये हैं कि देश में कोविड 19 के लिए बनाए जाने वाले विशिष्ट कोविड अस्पतालों की व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग के लिए अब तक कोई मैकेनिज्म तैयार नहीं किया जा सका है। इसके चलते कई राज्यों में कोविड अस्पताल के नाम पर बेहद अव्यवस्थित अस्पतालों का ढांचा खड़ा कर दिया गया। बिहार और यूपी के कई अस्पतालों से सामने आईं तस्वीरें और वीडियो इस बात की गवाही देते रहें।

 

मौजूदा दौर में ये बात याद करनी चाहिए कि पहले लॉक डाउन की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई 21 दिनों तक चलने वाली है। उस समय ऐसा लगा कि संभवत भारत सरकार के पास कोरोना से लड़ने का कोई ब्लूप्रिंट तैयार है और हालात जल्द काबू में कर लिए जाएंगे लेकिन जिस तरह से प्रवासियों की वापसी और कोरोना का देश के गांवों तक पहुंचने की रफ्तार दिखी उससे साफ हो गया कि केंद्र सरकार कोरोना के खिलाफ लड़ाई में कमजोर पड़ रही है। धीरे धीरे मेन स्ट्रीम मीडिया ने कोरोना से जुड़ी खबरों को रुटीन खबरों की तरह परोसना शुरु कर दिया और टीवी चैनलों में कोरोना से अधिक अब सुशांत राजपूत की मर्डर मिस्ट्री की खबरें आ रहीं हैं।

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