मेरठ के इस अस्पताल ने अखबार में विज्ञापन देकर मुस्लिमों को भर्ती करने से इंकार क्यों कर दिया?

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कोरोना के संकट काल में उत्तर प्रदेश में एक अस्पताल ने मुस्लिमों को बिना कोरोना निगेटिव रिपोर्ट के एडमिट करने से मना कर दिया है। इस अस्पताल ने इस संबंध में एक विज्ञापन भी निकाला है। विज्ञापन में लिखा गया है कि हॉस्पिटल में किसी भी नए मुस्लिम मरीज को तब तक भर्ती नहीं किया जाएगा जब तक कि वह कोरोना निगेटिव होने की रिपोर्ट नहीं देगा। दिलचस्प ये है कि कुछ विशिष्ट मुस्लिमों पर ये नियम नहीं लागू होगा।

मेरठ के इस अस्पताल ने कहा है कि वो मुस्लिम जो सघन बस्तिओं में नहीं रहते हैं उन्हें इस नियम से छूट होगी। मुसलिम डॉक्टर, स्वास्थ्य कर्मी, जज, पुलिस कर्मी और शिक्षकों को इस नियम से छूट होगी। हालांकि आपातकाल में पहुंचने वाले मुस्लिमों को स्वैब टेस्ट के लिए सैंपल देना होगा और इसके लिए उन्हें 4500 रुपए का भुगतान करना होगा।

विज्ञापन में यह भी कहा गया है कि कुछ मुसलिमों के ख़राब रवैये के कारण सभी मुसलिम भाइयों को कुछ समय के लिए दिक्कत उठानी पड़ेगी। 

हालांकि सघन मुस्लिम बस्तियों में रहने वाले अन्य धर्मों के लोगों पर ये नियम लागू नहीं होगा।

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अस्पताल ने ये नियम लागू करने के पीछे मेरठ में तब्लीगी जमात के अधिकांश मरीजों का पाया जाना बताया है।

क्या राहुल गांधी वो सच कह गए जिससे मोदी सरकार अब तक बचती रही?

 




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