मतभेदों के बाद आखिरकार अब अधिकतर संत महात्मा कुंभ को तय समय से पहले खत्म करने पर राजी हो गए हैं। देश के बड़े अखाड़ों में से एक जूना अखाड़ा ने कुंभ के विसर्जन की घोषणा कर दी है।


 

कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए जूना अखाड़ा ने कुंभ के विसर्जन की घोषणा कर दी है। जूना अखाड़ा नागा संयासियों का सबसे बड़ा अखाड़ा है। शनिवार सुबह जूना अखाड़ा के पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद से पीएम नरेंद्र मोदी ने बात की थी और कुंभ के बचे स्नानों को प्रतीकात्मक रखने की अपील की थी। हालांकि निरंजनी अखाड़ा और आनंद अखाड़ा पहले ही कुंभ समाप्ति की घोषणा कर चुका था। उस वक्त कई अन्य अखाड़ों ने उनका विरोध भी किया था।

 

वहीं जूना अखाड़ा के साथ साथ उनके सहयोगी कई अन्य अखाड़ों ने भी कुंभ के विसर्जन की घोषणा कर दी है। अखाड़ा पदाधिकारियों एवं संतों की आपात बैठक में कोविड के बढ़ते हुए खतरे को देखते हुए यह निर्णय लिया गया। जूना के सहयोगी अग्नि, आह्वान और किन्नर अखाड़ा भी इसमें शामिल हैं। पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी और श्री तपोनिधि आनंद अखाड़ा ने भी शनिवार से कुंभ विसर्जन कर दिया है। विधिवत समापन 30 अप्रैल को होगा।

 

जूना अखाड़ा में शनिवार शाम आपात बैठक बुलाई गई। इसमें आपसी सहमति से कुंभ मेला के विसर्जन की घोषणा हुई। अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत प्रेमगिरि की अध्यक्षता एवं अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि के संचालन में यह फैसला लिया गया। संतों ने कहा कि कोरोना के बढ़ते प्रकोप से मेले में सामुदायिक संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ रही है। लिहाजा, सभी की सुरक्षा के लिए मेला विसर्जन आवश्यक हो गया है। श्रीमहंत हरिगिरि ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अपील के बाद अखाड़ा ने मेले में समस्त देवी-देवताओं जिनका आहवान किया था, उनका पूजा-अर्चना कर विर्सजन कर दिया गया।