उत्तराखंड में यूं तो घूमने की एक जगह तलाशिए तो दस निकल आएंगी लेकिन कुछ जगहें ऐसी हैं जो अपने आप में अद्वितीय हैं। इन्हीं में एक है भारत का अंतिम गांव माणा।


माणा गांव, उत्तराखंड के चमोली जिले में पड़ता है। माणा गांव की कहानी और क्या है इससे जुड़े मिथक आइए पढ़ते हैं।

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माणा की रोचक कहानी

कहते हैं कि माणा गांव में माणिक शाह नाम का एक व्यापारी रहता था। माणिक शाह बहुत बड़ा शिव भक्त था। एक बार गांव में लुटेरे पहुंचे और माणिक शाह को लूट लिया। यही नहीं लुटेरों ने माणिक शाह की गर्दन काट डाली। माणिक शाह इतना बड़ा शिवभक्त था कि गर्दन कटने के बाद भी उसका सिर शिव नाम का जाप करता रहा। माणिक शाह की ऐसी भक्ति देख भगवान शिव स्वयं प्रगट हुए और माणिक के शरीर पर वराह यानी सुअर का सिर जोड़ उसे ज़िंदा कर दिया। साथ ही उसकी भक्ति से खुश हो कर ये वरदान भी दिया कि जो भी माणा गाँव आएगा उसकी ग़रीबी तो दूर होगी ही, साथ ही वो अमीर भी जो जाएगा। उस दिन से माणा गाँव में शिव के रूप मणिभद्र की पूजा होती है।

कैसे पहुंचे माणा

माणा गाँव उत्तराखंड के चमोली जिले का एक छोटा सा गाँव है। इसे भारत का आखिरी गाँव भी कहा जाता है।  ऐसा इसलिए क्योंकि ये गाँव भारत-तिब्बत सीमा से बिल्कुल सटा हुआ है। दिल्ली से माणा गांव पहुंचने के लिए आप हरिद्वार तक ट्रेन से आ सकते हैं। इसके बाद आपको कोई टैक्सी लेनी होगी। हरिद्वार से बद्रीनाथ तक की दूरी तकरीबन 245 किलोमीटर होगी। यहां से आपको हिंदुओं के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बद्रीनाथ तक की यात्रा करनी होगी। माणा गांव, बद्रीनाथ से तीन किलोमीटर और आगे पड़ता है। इस यात्रा में आपको 10 से 12 घंटे तक का समय लग सकता है। ये निर्भर करेगा कि पहाड़ों में रास्ता कैसा है, ट्रैफिक कितना है और कुछ हद तक आपका ड्राइवर और गाड़ी कैसी है। आप देहरादून या ऋषिकेश से भी माणा की यात्रा शुरु कर सकते हैं। देहरादून में एअरपोर्ट है और आप यहां लैंड करने के बाद तकरीबन 319 किलोमीटर की यात्रा कर माणा पहुंच सकते हैं। याद रखिएगा कि ये पूरी तरह से पहाड़ी रास्तों का सफर है।

 

माणा में क्या क्या देखें

व्यास गुफा

माणा गाँव में सरस्वती नदी के किनारे बद्रीनाथ से सिर्फ़ 5 कि.मी. दूर व्यास गुफा है। ऐसा माना जाता है कि महर्षि वेद व्यास ने इसी गुफा में बैठ कर महाभारत के साथ ही 18 पुराण, ब्रह्म सूत्र और चारों वेदों की रचना की थी।  इस गुफा की छत भी किताब के पन्नों के आकार में हैं।

भीम पुल

माणा गाँव से थोड़ा आगे भीम पुल आता है जिसकी कहानी और भी दिलचस्प है। कहते हैं कि पांडव अपना राज-पाठ छोड़ कर जब स्वर्ग की ओर जा रहे थे तो वे माणा गाँव से होकर गुज़रे। रास्ते के एक झरने को पार करने के लिए पांडवों में सबसे ताकतवर भाई भीम ने चट्टान फेंक कर पुल बनाया था।

माणा का नृत्य

माणा का लोक नृत्य बागड़वाल भी भारत की संस्कृति का एक अटूट अंग माना जाता है। इस डांस में आदमी और औरत दोनों हिस्सा लेते हैं।

badrinath temple

ब्रदीनाथ के दर्शन करें

माणा और भगवान बद्रीनाथ मंदिर के बीच की दूरी तीन किमी की है। हिंदुओं के चार धामों में से एक बद्रीनाथ मंदिर की बेहद महत्ता है। ऐसे में बद्रीनाथ के दर्शन जरूर करें।



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