उत्तराखंड में गायकी के नए सितारे हैं सौरभ मैठाणी। सितारा इसलिए क्योंकि संभवत सौरव मैठाणी (Video album of Saurav Maithani) ने उत्तराखंड की संगीत परंपरा में वो नायाब प्रयोग कर दिखाया है जिसकी हिम्मत अभी तक कोई नहीं कर पाया। सौरव मैठाणी ने गढ़वाली में गजलों की शुरुआत की है। उनका गढ़वाली गज़लों का पहला एल्बम ‘धागु ह्वेगे जिंदगी’ यू ट्यूब पर रिलीज हो चुका है।


सौरव मैठाणी saurav maithani

सौरव मैठाणी का ये म्यूजिक एल्बम न सिर्फ आपको सुकून देता है बल्कि उत्तराखंड में संगीत प्रेमियों के लिए एक सुखद एहसास भी देता है। सौरभ के इस अभिनव प्रयोग से पिछले कुछ सालों से गढ़वाली वीडियो एल्बम्स में आए ठहराव को रवानगी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इस एल्बम के सहारे सौरभ ने गढ़वाली संगीत के क्षेत्र में एक बड़ी लकीर भी खींची है। उन्होंने एक ऊंचा पैमाना बना दिया है और साथ ही औरों से खुद को अलग भी कर लिया है।

मेहनत रंग लाई है

इस एल्बम को देख कर लगता है कि सौरभ ने खासी मेहनत की है। हालांकि सुधार की गुंजाइश कभी खत्म नहीं होती लेकिन सौरव मैठाणी और उनकी टीम का कॉर्डिनेशन इस एल्बम को सुनने योग्य बना देता है। सौरभ गज़लों में होने वाले ठहराव, तरन्नुम, मौशिकी को समझते हुए गाते दिखते हैं। खास बात ये है कि वो गज़ल को महसूस करते दिखते हैं। यही इस एल्बम को और खास बनाता है।

 

म्यूजिक की बात करें तो संजय कुमोला का संगीत आपको सुनना ही पड़ेगा। लिरिसिस्ट हैं मधुसूदन थपलियाल और डायरेक्शन है सोहन चौहान का।

 

काफी दिनों से एक जैसे गढ़वाली एल्बम सुनकर बोर हो चुके लोगों के लिए ये एल्बम वाकई सुकूनभरा हो सकता है।


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