चीफ जस्टिस ही हैं मास्टर ऑफ रोस्टर, सुप्रीम कोर्ट ने किया स्पष्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि चीफ जस्टिस मास्टर ऑफ रोस्ट होते हैं और केसों के आवंटन का अधिकार चीफ जस्टिस के पास है। कौन सा मामला किस जज के पास भेजना है, यह तय करने का अधिकार चीफ जस्टिस को है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि केसों के आवंटन में चीफ जस्टिस को कोलेजियम के अन्य सदस्य से सलाह-मशविरा करने की दरकार नहीं है। न्यायमूर्ति एके सिकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि न्यायिक छोर पर चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के बाकी अन्य जज बराबर है लेकिन प्रशासनिक तौर पर चीफ जस्टिस को निर्णय लेना होता है जिससे कि सुप्रीम कोर्ट का काम सुचारू तरीके से चलता रहे।

प्रशासनिक तौर पर चीफ जस्टिस को न्यायपालिका का प्रवक्ता या प्रतिनिधि की भूमिका का निर्वाह करना होता है। प्रक्रियात्मक सुधार और उसके अमल न्यायिक सुधार का अहम हिस्सा है। न्यायपालिका का उद्देश्य न्याय देना है। केसों के आवंटन को लेकर चीफ जस्टिस के अधिकारों को चुनौती देने वाली वरिष्ठ वकील शांति भूषण की याचिका का निपटारा करते हुए दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि चीफ जस्टिस मास्टर ऑफ रोस्टर होते हैं। केसों को किस पीठ के पास भेजना चाहिए, यह चीफ जस्टिस का विवेक पर है। जजों की विशेषज्ञता और उनकी प्राथमिकताओं को देखते हुए चीफ जस्टिस के द्वारा लकेसों का आवंटन किया जाता है।

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एक बार जब किसी मामले को पीठ के पास भेज दिया जाता है उसके बाद चीफ जस्टिस का दखल खत्म हो जाता है। पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील की उस दलील को खारिज कर दिया कि चीफ जस्टिस का मतलब कोलेजियम होता है और चीफ जस्टिस को कोलेजियम के बाकी सदस्यों से सलाह-मशविरा करने के बाद केसों का आवंटन करना चाहिए। पीठ ने कहा कि कोलेजियम जजों की नियुक्ति तक सीमित है। शीर्ष अदालत ने कहा कि चीफ जस्टिस की भूमिका पर संविधान मौन है। न तो संविधान के किसी प्रावधान में और न ही किसी कानून में चीफ जस्टिस की भूमिका को लेकर विशेष प्रावधान है।

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वर्षों से चली आ रही स्वस्थ परंपरा व मान्यता और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के आधार पर चीफ जस्टिस को केसों के आवंटन का अधिकार है। याचिकाकर्ता शांति भूषण की वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे और प्रशांत भूषण की ओर से दलील दी गई थी कि चीफ जस्टिस को मनमाने तरीके से केसों का आवंटन करने का अधिकार नहीं है। उनका कहना था कि केसों का आवंटन या तो कालेजियम(चीफ जस्टिस व सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जज) द्वारा किया जाना चाहिए या फुल कोर्ट द्वारा। कम से कम महत्वपूर्ण और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में तो ऐसा होना ही चाहिए। प्रशांत भूषण ने कहा कि मामले के आवंटन को लेकर भारी अनियमितताएं हैं।




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