तेज़ रफ़्तार से चल रही भारत की अर्थव्यवस्था, तेल की कीमतों पर सकती है फिसल

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अगले साल होने वाले आम चुनावों को देखते हुए सरकार ने अपना खर्च बढ़ा दिया है। ऐसे में अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार बनी हुई है। लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें इस बीच रोड़ा बनी हुई है। फ्रांस को पीछे कर दुनिया में छठे स्थान पर आने वाली 13 लाख करोड़ की भारतीय अर्थव्यवस्था में मार्च 2019 तक 7.4 प्रतिशत की वृद्धि देखी जा सकती है। 2020 में विकास दर में 7.6 फीसदी की वृद्धि होने के अनुमान हैं।

रॉयटर्स के मुताबिक चीन की अर्थव्यवस्था 6.6 की विकास दर के साथ दूसरे नंबर पर रह सकती है। लेकिन पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में रेकॉर्ड बढ़ोतरी भारत के लिए सबसे बड़ा रोड़ा बनी हुई है। रुपये में गिरावट के दौरान तेल के आयात के लिए बड़ी रकम चुकाना इस भविष्यवाणी के लिए खतरा बना हुआ है। रॉयटर्स के पोल में 41 जानकारों में से 60 पर्सेंट का कहना है कि तेल की कीमतों की वृद्धि सबसे बड़ी समस्या है क्योंकि इससे रिजर्व बैंक की ब्याज दरें भी बढ़ सकती हैं।

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अर्थशास्त्री शशांक मेंदिरात्ता ने कहा, ‘जब तेल की कीमतों में 10 डॉलर की बढ़ोतरी होती है तो भारत की विकास दर 30 से 40 बेसिस पॉइंट कम हो जाती है।’ 2016 में हुई नोटबंदी में अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ी थी लेकिन बाद में यह कवर हो गई। पिछले साल से लगातार इसमें वृद्धि हो रही है। बता दें कि आईएमएफ ने इस साल की विकास दर 7.3 रहने के अनुमान लगाए हैं। कुछ जानकारों का कहना है कि अमेरिका और अन्य देशों के बीच व्यापार विवाद का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ेगा




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