दिल्ली की असली बॉस ‘AAP’ – सुप्रीम कोर्ट

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AAP सरकार और उपराज्यपाल के बीच अधिकारों की जंग पर सुप्रीम फैसला आने के बाद केजरीवाल और उनके सहयोगी ऐक्टिव मोड में आ गए हैं। केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में घर-घर जाकर राशन कार्ड बनवाने और सीसीटीवी लगाने के प्रस्तावों में तेजी लाने का भी निर्देश दिया गया है।

कोर्ट ने इसके साथ ही दिल्ली सरकार और एलजी को आपसी तालमेल से काम करने की सलाह भी दी। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में पुलिस, लॉ ऐंड ऑर्डर और लैंड के मामले में सभी अधिकारी एलजी के पास ही रहेंगे। इससे इतर सभी मामलों में चुनी हुई सरकार कानून बना सकती है। गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने अगस्त 2016 में दिए अपने फैसले में कहा था कि दिल्ली केंद्रशासित प्रदेश है और संविधान के अनुच्छेद 239 एए के तहत इसके लिए खास प्रावधान किए गए हैं। ऐसे में राजधानी में एलजी प्रशासक की भूमिका में हैं।

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दिल्ली में केजरीवाल और एल जी के बीच चल रही अधिकारों की जंग मामले में सुुप्रीम कोर्ट ने  एल  जी को झटका दिया। पांच जजों के बेंच ने सर्वसम्मति से कहा कि असली ताकत मंत्रिपरिषद के पास है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंत्रिपरिषद के सभी फैसलों से उप-राज्यपाल को निश्चित रूप से अवगत कराया जाना चाहिए, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि इसमें उप-राज्यपाल की सहमति आवश्यक है। कोर्ट की संविधान पीठ ने व्यवस्था दी कि उपराज्यपाल को फैसले लेने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं है और वह निर्वाचित सरकार की सलाह से काम करने के लिए बाध्य हैं।




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