उत्तराखंड का एक ऐसा DM जो खाट पर ही सो जाता है

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उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के डीएम मंगेश घिल्डियाल न सिर्फ राज्य की अफसर लॉबी के लिए एक उदाहरण हैं बल्कि पूरे देश के ब्यूरोक्रेसी को संदेश दे रहें हैं। मंगेश घिल्डियाल अपनी सादगी और सहद पहुंच के चलते जिस जिले में जाते हैं वहां लोगों के बीच लोकप्रिय हो जाते हैं। 

मंगेश घिल्डियाल फिलहाल रुद्रप्रयाग के डीएम हैं। फील्ड पोस्टिंग में आमतौर पर आईएएस अफसर आरामदायक जीवन के लिए प्रयासरत रहतें हैं लेकिन मंगेश कुछ अलग हैं। मंगेश अचानक ही रुद्रप्रयाग के एक गांव हाट में पहुंच गए। आमतौर पर उत्तराखंड के पहाड़ों में आईएएस अफसर नहीं पहुंचते हैं। पहुंचते भी हैं तो किसी विपत्ति या मजबूरी में। लेकिन मंगेश न विपत्ति में पहुंचे थे और न ही जल्दी निकलने के मूड में थे।

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हाट गांव पहुंचकर डीएम मंगेश घिल्डियाल ने सभी गांव वालों को एक जगह इकट्ठा किया, चौपाल लगी। लोगों से सीधे बातचीत शुरु हुई। गांववालों से उनकी समस्याएं सुनी। समाधान पर चर्चा भी हुई। चर्चा के दौरान रात गहरा गई। मंगेश घिल्डियाल ने रात गांव में बिताने का फैसला किया। दिलचस्प ये कि सोने के लिए नर्म मुलायम गद्दा नहीं तलाशा गया। डीएम मंगेश एक स्कूल में पहुंचे और वहीं एक क्लासरूम में चारपाई डालकर रजाई तान ली।

 

इस कहानी में एक कहानी और है। इस पूरी चौपाल में मंगेश घिल्डियाल अकेले नहीं थे। उनके साथ 39 अफसरों की पूरी टीम पहुंची थी। अब आप सोचेंगे कि ये अफसर भला गांव में क्या करने पहुंचे। दरअसल मंगेश घिल्डियाल अपने अफसरों की कार्यशैली से परेशान हैं। अफसर कुर्सियां छोड़कर गांवों में नहीं जाना चाहते हैं। हालात ये हैं कि तनख्वाह काटने के बावजूद टालमटोल करते हैं। लिहाजा मंगेश उन्हें अपने साथ ही लेकर निकले। जिस हाट गांव में डीएम मंगेश घिल्डियाल ने चौपाल लगाई वहां तक पहुंचने के लिए सभी अधिकारियों को पांच किलोमीटर की लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ी।

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