वाह रे त्रिवेंद्र सरकार, पहाड़ की चिंता नहीं और दून के लिए ले आए अध्यादेश

451

वाह री त्रिवेंद्र सरकार, पहाड़ की जनता और जन प्रतिनिधि गुहार लगाते रह गए और सरकार देहरादून के चार विधायकों के सामने घुटने पर बैठ गई। देहरादून की मलिन बस्तियों पर अतिक्रमण हटाओ अभियान की गाज न गिरे इसके लिए राजधानी के चार बीजेपी ने दबाव बनाया और सरकार अध्यादेश लेकर आ गई। बस्तियों को बचाने के लिए अब विस्थापन की योजना लायी जाएगी।  35 विधायक होने के बावजूद कई वर्षों में पहाड़ के एक भी गांव के विस्थापन और पुनर्वास की फाइल शासन में आगे नहीं बढ़ पाई। जबकि राजधानी के केवल चार विधायकों ने ऐसा दबाव बनाया कि सरकार को अवैध मलिन बस्तियों को बचाने के लिए अध्यादेश तक लाना पड़ गया।

पहाड़ के करीब 350 गांव पिछले काफी समय से आपदा की जद में हैं। खुद सरकारी विभागों के सर्वे में इन गांवों को अति संवेदनशील और रहने के लिए असुरक्षित माना गया है। उसके बावजूद इन गांवों के विस्थापन की कोई ठोस
योजना नहीं बन पाई है। औपचारिकता निभाने के लिए प्रस्ताव तैयार किए गए, लेकिन उसे आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए।

नीति आयोग की बैठक में पिछले कई वर्षों से गांवों के पुनर्वास का मुद्दा उठाया जा रहा है। राज्य सरकार का तर्क है कि पुनर्वास और विस्थापन के लिए करीब 10 हजार करोड़ के पैकेज की जरूरत है। राज्य सरकार अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति और जमीन की कमी का बहाना बनाते हुए इससे बचती रही। पिछले कुछ सालों के दौरान इन गांवों की संख्या बढ़कर 400 से अधिक हो गई है।




LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here