क्या है श्राइन बोर्ड, क्यों विरोध कर रहें हैं पुरोहित, समझिए यहां

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देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा में श्राइन बोर्ड विधेयक पास हो गया है। इसका नाम बदल दिया गया है। इस विधेयक को लेकर पूरे राज्य के मंदिरों के पुरोहित आंदोलन कर रहें हैं। आइए समझते हैं कि पुरोहित श्राइन बोर्ड का विरोध क्यों कर रहें हैं?

उत्तराखंड चारधाम श्राइन प्रबंधन विधेयक के तहत सरकार श्राइन बोर्ड के संचालन के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानि सीईओ को असीमित अधिकार देगी। बोर्ड द्वारा समय-समय पर किए जाने वाले प्रावधानों का पालन कराना, सीईओ की जिम्मेदारी होगी। चारधाम और उनसे संबद्ध सभी मंदिरों का प्रशासन सीईओ के नियंत्रण में होगा। पुरोहितों को डर है कि उनके अधिकार मंदिरों से खत्म हो जाएंगे। हालांकि सरकार कह रही है कि पुजारी, न्यासी, तीर्थ पुरोहित, पंडों और संबंधित हक-हकूकधारियों को वर्तमान में मिलने वाले सभी दस्तूरात और अधिकार यथावत रहेंगे।

विधेयक के अनुसार, सीईओ यह भी सुनिश्चित करेगा कि चारधाम निधि में मंदिरों की आय नियमानुसार जमा हो। मंदिरों की संपत्ति, मूल्यवान वस्तुओं, सोना-चांदी,आभूषण और देवताओं की निहित संपत्ति के सरंक्षण के लिए पुख्ता सुरक्षा प्रबंधन भी सीईओ के जिम्मे होगा। पुजारियों, पदधारक न्यासी आदि का वेतन बोर्ड की सहमति के बाद सीईओ ही तय करेगा। श्राइन बोर्ड के लागू होने के दिन से चारधाम और संबंधित सभी मंदिरों की संपत्ति बोर्ड की हो जाएगी। भले ही यह संपत्ति सरकार, जिला पंचायत, परिषद किसी निकाय, संगठन, समिति या कंपनी किसी के भी अधिकार में हो। बोर्ड को प्रथागत-वंशानुगत अधिकारी एवं हक-हकूकधारी के अधिकारों संबंधी किसी भी विषय अथवा विवाद को सुनने के लिए समिति बनाने का अधिकार होगा।                  

  • श्राइन बोर्ड विधेयक में किया गया प्रावधान, चारधाम और संबद्ध मंदिरों का प्रशासन भी सीईओ के नियंत्रण में रहेगा
  • मंदिर की संपत्तियों, सोना-चांदी और जेवरात का बनेगा पूरा रिकार्ड, रिकार्ड की सालाना जांच भी की जाएगी।
  • श्राइन बोर्ड की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने, अवैध कब्जे पर तीन साल तक की जेल और 25 हजार रुपये तक का जुर्माना
  • तीर्थस्थलों में उत्पात करने अथवा यात्रियों को परेशान करने पर भी जेल और जुर्माने का किया गया है प्रावधान
  • श्राइन बोर्ड के लागू होने  के दिन से चारधाम और संबंधित सभी मंदिरों की संपत्ति बोर्ड की हो जाएगी।

तीन माह से तीन साल तक की जेल भी
धार्मिक श्राइन और उसके आसपास शांति भंग करने, तीर्थयात्रियों को परेशान करने पर तीन महीने की जेल और दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगेगा। बोर्ड की संपत्ति और दस्तावेजों अवैध कब्जा करने अथवा नुकसान पहुंचाने पर तीन साल की जेल और 25 हजार रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान है।

उच्चस्तरीय समिति
राज्य सरकार धार्मिक यात्रा के संचालन के लिए कई विभागों को शामिल करते हुए उच्चस्तरीय समिति गठित करेगी। इसके अध्यक्ष मुख्य सचिव होंगे।
श्राइन बोर्ड के कार्य यह उच्चतम संचालन संस्था होगी। बोर्ड के अधीन आने और वाले सभी मंदिरों की संपत्ति, निधि, मूल्यवान प्रतिभूतियां, आभूषण के सुरक्षित रखरखाव,संरक्षण और प्रबंधन के निर्देश दे सकेगा। नियमानुसार वेतन भत्ते की प्रक्रिया तय करेगा। चारधाम निधि से उनका भुगतान किया जाएगा। मंदिर और तीर्थयात्रियों की सुविधाओं के प्रबंधन के लिए जरूरी गतिविधियों की निगरानी, निर्देशन और नियंत्रण भी करेगा। बोर्ड के सीईओ के आदेश के खिलाफ तीस दिन के भीतर बोर्ड से अपील की जा सकेगी।

संपत्ति का बनेगा रजिस्टर
मंदिरों की समस्त संपत्ति का रिकार्ड भी तैयार किया जाएगा। इसके लिए रजिस्टर बनेंगे। इनमें श्राइन की उत्पत्ति, इतिहास, पूर्व और वर्तमान न्यासियों के नाम्र वंशानुगत पुजारी या न्यासी के कार्यालय के उत्तराधिकार से संबंधित विशेष परंपरा या रीतियों का रिकार्ड बनाया जाएगा। धन, आभूषण, सोना, चांदी, कीमती पत्थर, मूर्तियां, प्राचीन  वस्तुएं, बर्तनों का पूरा विवरण और उनका वर्तमान अनुमानित मूल्य का भी रजिस्टर तैयार होगा। इन रजिस्टर का सालाना परीक्षण भी किया जाएगा।




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