‘खैरासैंण के सूरज’ से ‘डोईवाला के अभिमन्यु’ बने त्रिवेंद्र!, छल से वध प्रसंग को किया याद

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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अब अपने आप को अभिमन्यु साबित कर रहें हैं। उन्होंने एक प्रसंग को उद्धृत करते हुए कहा है कि अभिमन्यु का छल से वध हुआ, पांडवों इसका प्रतिकार करो। त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस तरह के बयान को सियासी गलियारों में उनके सीएम पद से हटाए जाने के बाद पनपी नाराजगी के साथ जोड़ा जा रहा है।


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दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत हाल ही में अपनी विधानसभा क्षेत्र डोईवाला में एक होली मिलन के कार्यक्रम में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में उन्होंने लोगों को संबोधित भी किया। इसी दौरान उन्होंने अभिमन्यु वध का प्रसंग सुनाया। अखबारों में प्रकाशित समाचारों के अनुसार त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि, अभिमन्यु के वध पर द्रोपदी शोक नहीं करती है। हाथ खड़े करके कहती है, अभिमन्यु का छल से वध हुआ है, पांडवों इसका प्रतिकार करो। द्रोपदी रोती नहीं है। वह संदेश देती है कि कौरवों ने अत्याचार किया है। अब पांडव प्रतिकार करें और अभिमन्यु के वध का बदला लें।

एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि उन्हें पद से क्यों हटाया गया ये उन्हें नहीं पता है। खबरें हैं कि ये बात उन्होंने कार्यक्रम के दौरान भी मंच से कही।

ऐसे में जाहिर है कि मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत नाराज तो हैं लेकिन रोना नहीं चाहते हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत पार्टी आलाकमान की कार्यप्रणाली से भी खुश नजर नहीं आ रहें हैं।

वहीं त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि वो चार साल तक मुख्यमंत्री रहे और उनपर भ्रष्टाचार का एक भी दाग नहीं लगा। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि वो राजनीति की काली सुरंग से बेदाग निकले। हालांकि त्रिवेंद्र ने ये भी कहा कि उनके क्षेत्र के कार्यकर्ता काफी तकलीफ में हैं।