त्रिवेंद्र सिंह रावत : जिनके काम से अधिक उनके हटाए जाने की चर्चा होती है

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उत्तराखंड में होने वाली राजनीतिक चर्चाओं में जब भी कभी त्रिवेंद्र सिंह रावत का जिक्र आएगा तब तब उनके काम के साथ साथ उनके हटने की अफवाहों का जिक्र भी जरूर आएगा। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत संभवत: इस राज्य के पहले ऐसे सीएम हैं जिनके काम से अधिक उनके हटने की चर्चाएं होती रहीं हैं। इस पोस्ट को लिखे जाने तक के त्रिवेंद्र सिंह रावत के लगभग तीन साल के कार्यकाल में कम से कम दस मौके ऐसे आए होंगे जब उत्तराखंड सरकार में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं सतह से ऊपर आईं। कई बार ऐसे मौके आए जब राजनीतिक गलियारों में त्रिवेंद्र सिंह रावत बस अब गए तो तब गए वाली स्थिति में पहुंच गए। हालांकि मौजूदा हालात और बीजेपी की सियासी रणनीतियां साबित करती हैं कि वो त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाने का जोखिम और किसी अन्य को सीएम बनाने का खतरा कतई नहीं उठाना चाहेगी।

विजय बहुगुणा से हरदा वाली कहानी

त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाने की अफवाहों पर वक्त देनेे से पहले याद करिए त्रिवेंद्र से पहले की सरकार का हाल। विजय बहुगुणा को कांग्रेस ने कमान सौंपी और मुख्यमंत्री बनाए गए। इसी बीच आपदा आई और घबराई कांग्रेस ने हरीश रावत को मुख्यमंत्री की कुर्सी दे दी। फिर क्या हुआ ये सभी को मालूम है। हालांकि कांग्रेस और बीजेपी की परिस्थितियां भिन्न हैं लेकिन बीजेपी इस नजीर को अपनी रणनीतियां बनाते समय याद तो जरूर करती होगी।

जोखिम, जोखिम और जोखिम

पिछले तीन सालों या त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार बनने के बाद कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव हुए। इन सभी चुनावों में बीजेपी ने जीत हार की गुणा भाग से अलग हटकर सीएम का चेहरा पुराना ही रखा। ऐसे में जाहिर है कि बीजेपी के लिए सीएम के चेहरे से अधिक सरकार के कामकाज महत्वपूर्ण है। फिर चुनावों से साल या दो साल पहले सीएम को बदल देना जोखिम भरा ही है। क्योंकि इससे ये संदेश स्पष्ट हो जाएगा कि सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान अच्छा काम नहीं किया। नए चेहरे की तलाश में कई बार कई चेहरे अपनी दावेदारी करने लगते हैं। बीजेपी में अनुशासन है लेकिन इस बात की गारंटी कोई नहीं ले सकता कि सीएम बनने की चाह रखने वाले बीजेपी में भी कई विधायक हैं।

दिल्ली में त्रिवेंद, दून में अफवाहें

दिलचस्प ये भी है कि त्रिवेंद्र सिंह रावत के दिल्ली के लिए निकलते ही दून में सीएम बदले जाने की खबरें गलियारों में तैरने लगती हैं। हैरानी तो तब होती है जब कई चर्चाओं में निशंक और विजय बहुगुणा तक के नाम पर नए सीएम के तौर पर मुहर लगने के दावे भी सामने आने लगते हैं। हालांकि मौजूदा दौर में लगता नहीं कि निशंक केंद्रीय मंत्री का पद छोड़कर सीएम बनने की कोशिश करेंगे। फिर विजय बहुगुणा भी खबरों के मुताबिक राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं। ऐसे में वो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर कांटों भरी कुर्सी पर बैठना कहां तक पसंद करेंगे?

तो होगा क्या?

फिलहाल बीजेपी के विश्वस्त सूत्र जो बताते हैं उसके मुताबिक उत्तराखंड में सीएम त्रिवेंद्र के बदले जाने की संभावनाएं ना के बराबर हैं। हालांकि पार्टी के अंदर सरकार के कामकाज और सीएम की लोगों के बीच बन रही छवि को लेकर मंथन जरूर है लेकिन पार्टी किसी बड़े बदलाव के बारे में फिलहाल नहीं सोच रही है। ऐसे में उम्मीद यही है कि त्रिवेंद्र सिंह रावत अपना कार्यकाल पूरा करेंगे।