केंद्र और ट्वीटर इंडिया के बीच गतिरोध बढ़ता जा रहा है। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्वीटर को नोटिस जारी कर दिया है।


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दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर को नए सूचना तकनीकी नियमों का पालन न करने के लिए नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने ट्विटर को जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया और मामले की सुनवाई 6 जुलाई को तय की।

अदालत अधिवक्ता अमित आचार्य द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने ट्विटर पर सूचना तकनीकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल आचार संहिता) नियम 2021 का पालन न करने का आरोप लगाया था, जो 25 मई को लागू हुआ था।

नए दिशानिर्देशों में ट्विटर, व्हाट्सएप, फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों को अपनी सामग्री को रेगुलेट करने, शिकायत अधिकारियों को नियुक्त करने की आवश्यकता है, जो शिकायत के लिए उत्तरदायी होंगे, और व्यक्तिगत संदेशों का पता लगाने और स्वैच्छिक उपयोगकर्ता सत्यापन जैसे उपायों को अपनाएंगे।

ट्विटर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता साजन पूवाया ने अदालत को बताया कि 28 मई को एक रेजिडेंट शिकायत अधिकारी की नियुक्ति की गई है।

सरकार के वकील रिपुदमन भारद्वाज ने इस रुख का विरोध किया। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उसे ट्विटर में शिकायतकर्ता नहीं होने के बारे में तब पता चला जब वह कुछ ट्वीट्स के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने गया था।

हाल ही में नए आईटी नियमों को लेकर ट्विटर और केंद्र के बीच वाकयुद्ध छिड़ गया था, जिसमें ट्विटर ने कहा था कि यह इन नियमों के उन तत्वों में बदलाव की वकालत करना जारी रखेगा जो मुक्त, खुली सार्वजनिक बातचीत को रोकते हैं।

सरकार और ट्वीटर के बीच गतिरोध

दिल्ली पुलिस कंपनी को एक मामले में नोटिस देने के लिए 25 मई को ट्विटर इंडिया के कार्यालय गई थी। ट्विटर ने भारत में अपने कर्मचारियों के लिए “चिंता” और लोगों के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए संभावित खतरे को व्यक्त करते हुए एक बयान जारी किया था। जवाब में केंद्र ने ट्विटर पर दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत को बदनाम करने के लिए आधारहीन और झूठे आरोप लगाने व शर्तों को निर्धारित करने का आरोप लगाया।

व्हाट्सएप जैसे अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि नए नियम निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करते हैं। Google के सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा कि Google मुफ्त और खुले इंटरनेट की वकालत करता है। उन्‍होंने कहा कि कंपनी स्थानीय कानूनी प्रक्रियाओं का सम्मान करती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर पीछे हट सकती है।


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