देहरादून में नहीं थी कोई खास परेशानी, परिवार के दबाव में लौटे कश्मीरी छात्र

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‘दून में ऐसी कोई बड़ी दिक्कत नहीं थी। कश्मीर में परिवार वाले परेशान थे। उनके लगातार फोन आ रहे थे। मीडिया में जिस तरह की रिपोर्ट आ रही थी, इससे उन्हें बच्चों की चिंता हो रही थी। ऐसे में कश्मीरी छात्रों ने घर लौटना सही समझा। बाकी यहां कोई ऐसी परेशानी नहीं है। यह कहना है दून में कश्मीरी छात्रों के लिए काम करने वाले जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट आर्गनाइजेशन के प्रवक्ता नासिर खोएहामी का।’

नासिर कहते हैं कि 15 फरवरी को दून के कॉलेजों में जिस तरह के प्रदर्शन हुए, उसका मैसेज बहुत गलत गया। कश्मीरी छात्रों के परिवार चिंता करने लगे। यहां से छात्रों ने भी तब परिवारवालों को फोन किए। उसके बाद हालात ठीक हो गए थे। छात्रों को किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आ रही थी। नासिर बताते हैं कि दून में चार हजार के लगभग कश्मीरी छात्र पढ़ते हैं। कई कॉलेज में परीक्षाएं हो चुकी थीं, ऐसे में ढाई हजार के लगभग छात्र पहले से ही कश्मीर लौट चुके थे। बाकी बचे डेढ़ हजार छात्रों में से भी कई 15 फरवरी के बाद घर से फोन आने पर लौटने लगे थे। यहां पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को बेहतर संभाला।

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कश्मीरी छात्रों के साथ ऐसी कोई घटना नहीं हुई। खालसा संगठन भी दून में कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा में पूरी मदद कर रहा है। वह किसी भी परेशानी की स्थिति में साथ खड़ा था, लेकिन अचानक पीडीपी नेता पहुंच गए। जो छात्र यहां रुकने का मन बना चुके थे, उन्हें उनके घर के हालात का हवाला देकर वापस ले गए। अभी भी कई छात्र दून में रुके हैं और उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है।