उत्तराखंड में चार धाम यात्रा फिलहाल शुरु नहीं होगी। राज्य में चार धाम यात्रा पर नैनीताल हाईकोर्ट ने अपनी रोक को बरकरार रखा है।


nainital highcourt

उत्तराखंड में चार धामा यात्रा शुरु करने की अनुमति नहीं दी है। नैनीताल हाईकोर्ट ने अपनी रोक को 18 अगस्त तक बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा है कि इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में वाद लंबित है। चूंकि वहां से कोई फैसला नहीं आया है लिहाजा यात्रा पर अगली सुनवाई तक रोक जारी रहेगी।

 

आपको बता दें कि एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य में चार धाम यात्रा पर रोक लगा दी थी। हालांकि सरकार ने चार धाम यात्रा शुरु करने का ऐलान कर दिया था लेकिन कोर्ट की मनाही के बाद सरकार ने पांव पीछे खींच लिए। वहीं सरकार हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में केस फिलहाल लिस्टेड नहीं हो पाया है। सुनवाई न होने से अभी यात्रा पर कोई फैसला नहीं हो पाया है।

कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट 

वहीं नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तराखंड सरकार से कोविड से बचाव की कई व्यवस्थाओं के बारे में रिपोर्ट भी मांग ली है। नैनीताल हाईकोर्ट ने सरकार से कई बिंदुओं पर जवाब मांगा है –

सरकारी अस्पतालों में पीडियाट्रिक वार्ड और पीडियाट्रिक वेंटिलेटर की क्या स्थिति है उसका विवरण अगली तिथि तक दें।

-राज्य में सरकारी अस्पतालों में नर्स एवं वार्ड बॉय आदि सपोर्ट स्टाफ के कितने पद खाली हैं और उनकी भर्ती के संबंध में क्या प्रक्रिया चलाई जा रही है और क्या कदम उठाए गए इसका विवरण दें।

– राज्य में डेल्टा प्लस वैरिएंट के संबंध में क्या स्थिति है और पूर्व में जो 300 सैंपल भेजे गए थे उनके संबंध में क्या परिणाम आए और इस संबंध में क्या सावधानियां बरती गई हैं इसका विवरण दें।

-इंटर्न चिकित्सकों को स्टाइपेंड बढ़ाने के बारे में घोषणा की गई है। उसको अगली तिथि से पूर्व लागू किया जाए और साथ ही उन लोगों का प्रतिमाह मानदेय समय पर प्रदान किया जाए ।

-राज्य में एंटी स्पिटिंग एंड एंटी लिटरिंग एक्ट 2016 के प्रावधान पूर्व से लागू हैं उनको सख्ती से अनुपालन कराया जाए।

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-राज्य में वैक्सीनेशन सेंटर्स की संख्या बढ़ाई जाए और जिन लोगों के मन में वैक्सीनेशन को लेकर संशय है और कुछ अंधविश्वास है तो उनके लिए राज्य सरकार भ्रम दूर करने के लिए उचित प्रचार-प्रसार करे।

-राज्य में वे सभी दिव्यांगजन जो अपने घर के पास स्थित वैक्सीनेशन सेंटर में भी पहुंचने की स्थिति में नहीं हैं। उनके लिए सभी जिलों के जिलाधिकारी घर पर ही वैक्सीन लग सके ऐसी व्यवस्था करें।

-राज्य में दिव्यांगजनों के लिए वैक्सीनेशन की उचित व्यवस्था की जाए और उनके कैंप वगैरह कहां लगेंगे, इसकी पूर्व सूचना जिलाधिकारी सभी माध्यमों से प्रचार-प्रसार करें। ऐसे कैंप में दिव्यांगजनों की सुविधाओं का पूर्ण ख्याल रखा जाएगा।

-राज्य सरकार ने अस्पतालों में निर्बल वर्ग के लिए 25% बेड आरक्षित किए थे, परंतु उक्त आदेश को 25 जुलाई को वापस ले लिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए कहा है।

-राज्य में स्थित सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध एंबुलेंस की स्थिति, सुविधाएं और उनकी क्षमता के संबंध में ऑडिट रिपोर्ट कोर्ट ने तलब की है।


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