उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) अपने सौम्य सरल स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। अक्सर उनका ये स्वभाव उनके सामान्य जीवन में भी दिखता ही रहता है। सभी से आत्मीयता से मिलना और उसकी परेशानी सुनने के साथ ही उसे दूर करने की कोशिश करना धामी को एक मॉस लीडर के तौर पर स्थापित कर रहा है।


पुष्कर सिंह धामीवहीं पुष्कर सिंह धामी का ऐसा ही कुछ व्यवहार फिर एक बार विधानसभा के भीतर देखने को मिला। विधानसभा सत्र के दूसरे दिन की सुबह कांग्रेस के दो विधायक हरीश धामी और मनोज रावत धरने पर बैठ गए।

हरीश धामी विधायक निधि रिलीज न होने पर नाराजगी जता रहे थे तो मनोज रावत चार धाम यात्रा शुरु करने की मांग कर रहे थे।

सीढ़ियों पर बैठे विपक्ष के विधायक

ये दोनों कांग्रेस विधायक सदन के ठीक बाहर सीढ़ियों पर ही बैठ गए। इसी बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सदन में प्रवेश के लिए उधर पहुंचे। पुष्कर सिंह धामी ने दोनों विधायकों को बैठे हुए देखा। तुरंत पुष्कर सिंह धामी दोनों विधायकों के पास पहुंचे और उनके हाथों की तख्तियों को अपने हाथ में लेकर देखने लगे।

तख्ती पर लिखी बातों को पढ़ने के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने हरीश धामी का हाथ पकड़ लिया और उन्हें उनकी मांगों के प्रति आश्वस्त करते हुए उठाने लगे। आखिरकार हरीश धामी भी मुख्यमंत्री पुष्कर धामी का आग्रह ठुकरा नहीं पाए और उठ खड़े हुए। इसके बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेसी विधायक मनोज रावत को भी आग्रह कर उठा ही लिया।

इसके बाद दोनों को अपने साथ लेकर सीएम सदन की और बढ़ गए।

इसके बाद सीएम ने तुरंत ही मुख्य सचिव को अपने कमरे में बुला लिया और दोनों विधायकों की अफसरों के साथ मीटिंग करा दी। इस दौरान सीएम खुद वहां बैठे रहे। बताया जा रहा है कि हरीश धामी की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई हो गई है। विधायक निधि का पैसा रिलीज करने की तैयारी चल रही है। वहीं मनोज रावत के चार धाम यात्रा शुरु करने की मांग को लेकर सीएम ने समय आने पर फैसले का आश्वासन दिया है।

पुष्कर सिंह धामी
दोनों कांग्रेस विधायकों व मुख्य सचिव के साथ चर्चा करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

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अन्य से अलग करता व्यवहार

सीएम पुष्कर सिंह धामी का विपक्ष के विधायकों के प्रति ये व्यवहार उन्हें अन्य राजनेताओं से अलग करता है। आमतौर पर मुख्यमंत्री के पद पर बैठे शख्स सदन के बाहर गलियारों या सीढ़ियों पर विपक्ष के नेताओं को नजरअंदाज कर निकल जाते हैं। लेकिन पुष्कर सिंह धामी ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने विपक्ष को भी पूरा आदर भाव दिया और उसे अपने साथ ले गए।


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