चमोली के नारायणबगड़ के कंडवाल गांव के जवान सचिन कंडवाल का पार्थिव शरीर गुरुवार को उनके पैतृक गांव में पहुंचा। तिरंगे में लिपटे सचिन के शव को देखकर पूरा गांव गमगीन हो गया। हरिद्वार के खड़खड़ी घाट पर उनका पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया।


sachin kandpal

आपको बता दें कि सचिन कंडवाल 55 बंगाल इंजीनियरिंग रेजीमेंट में पोस्टेड थे और इन दिनों उसकी यूनिट गलवान घाटी में तैनात है। सचिन को 25 जुलाई को ड्यूटी पर जाना था। इसी बीच उसे 16 जुलाई को यूनिट से बुलावा आ गया।

बताया जा रहा है कि उनका काफिला प्रयागराज के दिल्ली के लिए रवाना हुआ। मथुरा एक्सप्रेस वे पर विपरीत दिशा से आ रहे एक डंपर से सचिन के वाहन की आमने सामने टक्कर हो गई। इस हादसे में सचिन शहीद हो गए।

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सदमे में परिवार

25 वर्षीय सचिन इस महीने की शुरुआत में ही छुट्टी पर देहरादून आए थे। उनका परिवार देहरादून में ही रहता है। सचिन की शहादत से उनके परिवार वाले सदमे में है। बताया जा रहा है कि जल्द ही सचिन की शादी होने वाली थी। उसकी सगाई हो चुकी थी।

सचिन ने मंगलवार रात को अपने पिता मधुप्रसाद कण्डवाल तथा माता रजनी देवी से फोन पर बातचीत की थी। सचिन का छोटा भाई सौरभ कण्डवाल 22 गढवाल रेजीमेंट में कारगिल में तैनात है। पिछले साल सचिन अपनी सगाई पर गांव आया था।और अब परिवार के लोग शादी की तैयारियों में लगे हुए थे।

photo- amar ujala

हयात सिंह की शहादत को सलाम

वहीं मणिपुर में शहीद खटीमा में झनकट निवासी आसाम राइफल्स के हवलदार हयात सिंह महर का पार्थिव शरीर बुधवार को उनके निवास स्थान झनकट पहुंचा। शहीद का अंतिम संस्कार सैन्य सम्मान के साथ बनबसा शारदा घाट पर किया गया। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर है।

हवलदार हयात सिंह महर (48) पुत्र स्व. त्रिलोक सिंह 31 आसाम राइफल्स में मणिपुर में तैनात थे।  वह 1992 में भर्ती हुए थे। मूल रूप से पिथौरागढ़ जिले की डीडीहाट तहसील के ग्राम जमतड़ निवासी हयात सिंह का परिवार झनकट की डिफेंस कॉलोनी में रहता है।

शहीद के पार्थिव शरीर के साथ पहुंचे 31 आसाम राइफल्स के सूबेदार पूरन सिंह ने बताया कि शहीद हयात सिंह महर का उल्फा उग्रवादियों ने 12 जुलाई को अपहरण कर लिया था और 16 जुलाई को उनका पार्थिव शरीर मिला था। बनबसा छावनी स्थित 8 जेकलाई रेजीमेंट के जवानों ने शहीद के आवास पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद सेना के जवान पार्थिव शरीर को लेकर शारदा घाट पहुंचे। वहां जेकलाई रेजीमेंट के जवानों ने उन्हें सलामी दी। इसके बाद शहीद का अंतिम संस्कार हुआ।


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