महिलाएं ठंड में आधी रात को प्रदर्शन करती रहीं, उत्तराखंड ‘सरकार’ रजाई में सोती रही

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उत्तराखंड। अगर पूर्ण बहुमत की सरकार का मतलब लोकतांत्रिक तरीके से होने वाले प्रदर्शनों के प्रति पूर्णत: उपेक्षा का रवैया अपना लेना है तो उत्तराखंड की मौजूदा सरकार इस पैमाने पर खरी उतर रही है। पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं सीएम से मिलने और उनकी अपनी मांगों को पहुंचाने के लिए कूच करती हैं और पुलिस के दम पर उन्हें रोक दिया जाता है। महिलाएं सड़क पर ही बैठ जाती हैं और ठंड में आधी रात को भी बैठी रहती हैं लेकिन ‘सरकार’ अपने गर्म कमरे और रजाई से बाहर नहीं निकलती। सरकार तसल्ली से अपनी नींद पूरी करती है।

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आमतौर पर उत्तराखंड में मातृशक्ति का बेहद सम्मान किया जाता है। यहां महिलाओं के समाज में योगदान को कहीं से भी कमतर नहीं माना जाता है। लेकिन मौजूदा सरकार के पास मातृशक्ति की मांगों को सुनने का समय नहीं है। अपनी मांगों को लेकर काफी दिनों से धरना दे रहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की बात सुनने के लिए सरकार के पास वक्त नहीं है। हालात ये हैं कि न तो मांगों को सुना जा रहा है और न ही महिलाओं की मांगों पर विचार के लिए कोई आश्वासन ही दिया जा रहा है। सरकार ने अपना कोई नुमाइंदा भी इन कार्यकर्ताओं से बातचीत के लिए नहीं भेजा।

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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सीएम आवास की ओर कूच किया तो उन्हें सड़क पर ही रोक दिया गया। यहां भी सरकार का कोई नुमाइंदा नहीं पहुंचा। सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मांगें तक सुनने की कोशिश नहीं की है। महिलाएं ठंड की आधी रात को भी अपनी मांगों को लिए खुले आसमान के नीचे बैठी रहीं लेकिन सरकार ने कोई पहल नहीं की। सरकार सोती रही। इसके बाद महिलाओं को पुलिस ने जबरन गाड़ियों में भरकर एक धर्मशाला में पहुंचा दिया। इसके बाद महिलाएं फिर से सुबह तकरीबन चार बजे के बाद महिलाएं वापस परेड ग्राउंड पर लौट आईं और धरना फिर से शुरु कर दिया।

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इससे पहले भी सरकार आयुष कॉलेज के छात्रों के मसले पर ऐसा ही उपेक्षात्मक रवैया अपना चुकी है। आयुष छात्र लगभग दो महीनों तक बढ़ी हुई फीस के खिलाफ आंदोलन करते रहे। सरकार ने उनके आंदोलन को कोई तवज्जो नहीं दी। बाद में सरकार ने गोलमोल रवैया अपनाते हुए छात्रों को आश्वस्त किया कि फीस वृद्धि नहीं होने दी जाएगी। हालांकि अब भी कई कॉलेजों में बढ़ी हुई फीस ही ली जा रही है।




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