चमत्कार।। केदारनाथ आपदा के सात साल बाद जिंदा मिला शख्स, ऐसे बची जिंदगी

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देहरादून/ऊधमसिंह नगर। केदारनाथ में आई 2013 की भयावह आपदा के तकरीबन सात साल बाद अगर इस आपदा में गुमशुदा शख्स मिल जाए तो सोचिए कि उसके परिवार वालों को कितनी खुशी मिलेगी। ऐसी खुशी मिल रही है सितारगंज के रहने वाले जलील अहमद के परिवार वालों को। जलील अहमद के परिवार वालों को ये खुशी देने के लिए उत्तराखंड के पुलिसकर्मियों ने गजब काम किया। अपनी हर कोशिश कर जोशीमठ से लेकर सितारगंज के पुलिसकर्मियों ने जलील अहमद को उसके परिवार से मिला ही दिया।

पानी में बह गया सबकुछ

दरअसल ऊधम सिंह नगर, सितारगंज के रहने वाले जलील अहमद नौकरी की तलाश में निकले। कुछ समय बाद उन्हें लामबगड़ में काम मिल गया। वहां चल रहे पावर प्रोजेक्ट में वो काम करने लगे। कुछ सालों तक वो अपने परिवार वालों को पैसे भी भेजते रहे। परिवार चलता रहा। इसी बीच 2013 की आपदा आ गई। इस आपदा में जलील अहमद गंभीर रूप से चोटिल हुए। पानी में बह जाने की वजह से उनके पास पहचान साबित करने का कोई साधन भी नहीं बचा। आपदा ने दिमाग पर ऐसा प्रहार किया कि याद्दाश्त भी चली गई।

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टूटने लगी थी आस

भगवान का शुक्र रहा कि जलील अहमद की आपदा में जान बच गई। लोगों ने उन्हें एक आश्रम में भर्ती करा दिया। इस बीच जलील के परिवार वाले जलील को तलाश करते रहे। पुलिस को भी सूचना दी। कई बरस की तलाश के बावजूद भी जलील जब नहीं मिले तो परिवार वालों की आस भी टूटती रही।

देर है अंधेर नहीं

इसी बीच उत्तराखंड में ऑपरेशन स्माइल भी शुरु हुआ। बिछड़ों को अपनों से मिलाने की योजना बनी। इसी के तहत चमोली पुलिस ने जलील अहमद को आश्रम में तलाशा और उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल की। चमत्कार हो गया। ये तस्वीर जलील के घर वालों की आंखों के सामने से जैसे ही गुजरी उन्होंने जलील को पहचान लिया। इसके बाद चमोली पुलिस से संपर्क किया गया। इसके बाद पुलिस ने जलील और उनके परिवार वालों को मिलवाया। सात साल बाद जलील को उनका परिवार मिल गया है। शायद इसे ही कहते हैं ऊपर वाले के देर है अंधेर नहीं।

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