प्रमोशन में आरक्षण।। फंस गई सरकार, किधर जाए तय करना मुश्किल, अब कोर्ट का सहारा

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सीधी भर्ती और पदोन्नति के पदों पर आरक्षण रोस्टर को लेकर त्रिवेंद्र सरकार बड़े धर्म संकट में है। आरक्षण पर उदासीन रुख के चलते वह सामान्य और आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों के निशाने पर आ गई है। सामान्य वर्ग के कर्मचारी पदोन्नति पर लगी रोक न हटाए जाने से नाराज हैं तो आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को सरकार के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ एसएलपी जाना नहीं सुहा रहा है। दोनों मसलों पर सरकार की अनिर्णय की स्थिति से नाराज दोनों वर्गों से जुड़े कर्मचारी संगठन आंदोलन की घोषणा कर चुके हैं।

सामान्य वर्ग के कर्मचारी अपने प्रमोशन को और अधिक दिन तक टाले जाने से बेहद आक्रोशित हैं। लिहाजा उनका नेतृत्व कर रहे उत्तराखंड जनरल ओबीसी इम्पलाइज एसोसिएशन ने पहले चरण के आंदोलन की घोषणा कर दी है। उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय मंच पहले ही आंदोलन का कार्यक्रम जारी कर चुका है। वहीं उत्तराखंड एससी एसटी इम्पलाइज फेडरेशन ने भी 28 दिसंबर से सीधी भर्ती और प्रमोशन में आरक्षण रोस्टर को लेकर आंदोलन करने का फैसला किया है।

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कर्मचारी संगठनों के आंदोलित तेवरों के चलते सरकार असमंजस की स्थिति में है। वह न तो प्रमोशन पर लगी रोक हटाने का साहस कर पा रही है न ही एससी एसटी कर्मचारियों के प्रतिनिधित्व को लेकर पूर्व में गठित इरशाद हुसैन आयोग और इंदु कुमार समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक कर रही है। धर्मसंकट में फंसी सरकार को अब सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का आसरा है। सुप्रीम कोर्ट को विचाराधीन एसएलपी की सुनवाई 15 जनवरी को करनी है।

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