ढाई साल में पूरा नहीं हो पाया त्रिवेंद्र मंत्रिमंडल, मजबूरी या दूरी?

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सरकार का आधा कार्यकाल बीत गया है लेकिन अब तक मंत्रीमंडल की सभी कुर्सियां नहीं भरी जा सकीं हैं। हैरानी इस बात कि है कि प्रकाश पंत के निधन के बाद उनकी सीट पर उपचुनाव भी हो गया लेकिन सरकार प्रकाश पंत को मिले विभाग के लिए एक कैबिनेट मंत्री नहीं तलाश पाई।

फिलहाल ये विभाग मुख्यमंत्री ही देख रहें हैं। ऐसे में अब सवाल ये उठने लगा है कि सरकार को योग्य विधायक नहीं मिल रहें हैं सरकार किसी नए विवाद से बचने के लिए कैबिनेट का दरवाजा खोलना ही नहीं चाहती है।

हालांकि रह रह कर कैबिनेट विस्तार की खबरें यहां वहां से उड़ कर आती रहती हैं लेकिन अब भी कुछ विश्वास के साथ नहीं लिखा जा सकता है।

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कैबिनेट में सरकार बनने के बाद से ही दो पद रिक्त हैं। प्रकाश पंत के निधन के बाद एक और पद रिक्त हो गया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि प्रकाश पंत की पत्नी जो हाल ही में विधायक चुन कर आईं हैं, उन्हें कैबिनेट में लिया जा सकता है। हालांकि चंद्रा पंत के कैबिनेट मंत्री बनाए जाने की खबरों पर विश्वास कर भी लें तो भी इसके बाद भी कैबिनेट में दो अन्य सीटें खाली रहेंगी। यहां कौन आएगा ये बड़ा सवाल है।

आमतौर पर सरकार के कामकाज को सुचारु चलाते रहने के लिए कैबिनेट के मंत्रियों की नियुक्ति की जाती है। हालांकि ये सीएम का विशेषाधिकार है कि वो किसको कैबिनेट मंत्री बनाते हैं, उन्हें क्या पोर्टफोलियो देते हैं औऱ क्या अपने पास रखते हैं।

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