उत्तराखंड से बड़ी खबर है। उत्तराखंड में बद्रीनाथ धाम को मुस्लिम धर्मस्थान बताने वाले मौलवी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है।


उत्तराखंड से बड़ी खबरउत्तराखंड से इस वक्त की बड़ी खबर आ रही है। उत्तराखंड पुलिस ने एक मौलवी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। ये मुकदमा राजधानी देहरादून के रायपुर थाने में दर्ज किया गया है।

बताया जा रहा है कि उक्त अज्ञात मौलवी सोशल मीडिया में ब्रदीनाथ धाम के बारे में अशोभनीय टिप्पणियां कर रहा था। मौलवी बद्रीनाथ धाम को मुस्लिम धर्मस्थान बता रहा है। इस आपत्ति जनक टिप्पणी से आहत देहरादून के रहने वाले जगदंबा प्रसाद पंत ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद मुकदमा दर्ज किया है। ये मुकदमा अज्ञात मौलवी के खिलाफ धारा 153 A,  505 IPC/66 (F) IT में दर्ज हुआ है। अब पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी।

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आपको बता दें कि हाल ही में बद्रीनाथ में बकरीद के दिन कुछ लोगों के नमाज पढ़ने का मामला सामने आया था। कई लोगों ने इस संबंध में पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। हालांकि बाद में पुलिस ने अपनी जांच में पाया था कि ये नमाज खुले में नहीं बल्कि बंद कमरे में पढ़ी गई थी। पढ़ने वाले बद्रीनाथ धाम में जारी निर्माण कार्यों में लगे मजदूर थे।

हालांकि इसे लेकर कई हिंदु संगठनों ने खासी नाराजगी जताई थी और बद्रीनाथ में अनार्यों के प्रवेश पर प्रतिबंध की बात भी कही थी।

इसी मसले को लेकर सोशल मीडिया पर अलग अलग ग्रुपों में बहस जारी है। इसी बीच एक मौलवी ने विवादित टिप्पणी करते हुए दावा किया कि बद्रीनाथ मुस्लिमों का धर्मस्थान है।

बद्रीनाथ का महत्व

हिंदुओं के लिए बद्रीनाथ बेहद महत्वपूर्ण धर्मस्थान है। हिंदुओं के चार धामों में से बद्रीनाथ एक है। मान्यता है कि स्वयं भगवान विष्णु इस धाम में निवास करते हैं। हिंदुओं की इच्छा होती है कि कम से कम जीवन में एक बार जरूर बद्रीनाथ भगवान के दर्शन कर लें। हिंदु अपनी गहरी आस्था लिए दूर दूर से भगवान बद्रीनाथ के दर्शन करने आते हैं।

भगवान बद्रीनाथ को बद्री विशाल नाम से पुकारते हैं। भारतीय सेना के कुमाऊँ व गढ़वाल रेजीमेंट के सैनिकों का विजय उद्‍घोष ‘जय बद्री विशाल है।’ बद्रीनाथ मंदिर को अनादिकाल से स्थापित माना जाता है जिसकी पुनर्स्थापना जगद्‍गुरु आदि शंकराचार्य ने करवाई थी। इसका जीर्णोद्धार रामानुज संप्रदाय के स्वामी वरदराजाचार्य के आदेश पर गढ़वाल नरेश ने करवाया। इसमें इंदौर की महारानी अहिल्याबाई ने भी योगदान दिया। बद्रीनाथ की महिमा का वर्णन स्कंद पुराण, केदारखंड, श्रीमद्‍भागवत आदि में अनेक जगहों पर आता है।

जगद्गुरु शंकराचार्य ने ही मंदिर की प्रशासन व्यवस्था बनाई। उन्होंने ज्योतिर्मठ के मठाधीश को बद्रीनाथ मंदिर की पूजा व्यवस्था देखने का दायित्व सौंपा। 1776 तक यह सिलसिला चलता रहा। 1776 में उनके ब्रह्मलीन हो जाने से यह पूजा व्यवस्था वहाँ उपलब्ध नंबूदरीपाद ब्राह्मणों ने संभाली। बाद में अंग्रेज सरकार ने गढ़वाल के जिलाधीश को अध्यक्ष नामित कर मंदिर प्रबंधन के लिए एक समिति बना दी।


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