Uttarakhand: उत्तराखंड विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार 23 अगस्त से शुरु हो रहा है। इस सत्र की अवधि फिलहाल पांच दिन नीयत की गई है।


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उत्तराखंड विधानसभा का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरु हो रहा है। माना जा रहा है कि ये सत्र हंगामेदार हो सकता है। विपक्ष सदन में सरकार को घेरने की पूरी कोशिश करेगा। कई ऐसे मसले हैं जिनपर धामी सरकार को जवाब देना होगा।

 

न सिर्फ विपक्ष को संतुष्ट करना होगा बल्कि सदन के माध्यम से जनता को भी संदेश देना होगा। संभव है कि चुनावों से पहले ये सरकार का अंतिम सत्र हो। ऐसे में सरकार इस सत्र में कई अहम मसलों पर निर्णायक फैसले का दबाव लेकर पहुंचेगी।

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सत्र के पहले दिन दिवंगत विधायकों को सदन में श्रद्धांजलि दी जाएगी। सत्र के दौरान कोविड प्रोटोकॉल का पालन कर विधायकों के बैठने के साथ सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

 

पुष्कर सिंह धामी के लिए बतौर मुख्यमंत्री यह पहला विधानसभा सत्र होगा। संसदीय कार्य मंत्री के रूप में बंशीधर भगत के ऊपर सदन में सरकार का पक्ष रखने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। जबकि नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद प्रीतम सिंह के लिए पहला सत्र है। पक्ष व विपक्ष सदन में नए अंदाज में नजर आएगा।

मसले हजार, घेरने को विपक्ष तैयार

इस सत्र में विपक्ष के पास देवस्थानम बोर्ड, हरिद्वार में कोविड जांच फर्जीवाड़ा, महंगाई, बेरोजगारी, कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को लेकर सदन में सरकार की घेराबंदी करने का आखिर मौका है। जबकि सत्तापक्ष ने भी विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने की तैयारी की है। सत्र के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों से 788 प्रश्न मिले हैं।

वहीं इस सत्र के दौरान 30 विधायक वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जुड़ेंगे। दरअसल सदन के भीतर कोविड प्रोटोकॉल के तहत 70 में सिर्फ 40 विधायकों के बैठने की व्यवस्था की जा सकी है। बचे हुए 30 विधायकों के लिए प्रकाश पंत भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंंस के जरिए जुड़ने की व्यवस्था की गई है।


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