क्या आप भी अपने खर्राटों की समस्या को लेकर परेशान हैं? या फिर घर वालों के ताने सुनने पड़ते हैं तो आइए आज समझतेे हैं कि खर्राटे क्यों आते हैं और इसका इलाज क्या हो सकता है।


what-happens-when-you-snore क्या आप भी अपने खर्राटों की समस्या को लेकर परेशान हैं? या फिर घर वालों के ताने सुनने पड़ते हैं तो आइए आज समझतेे हैं कि खर्राटे क्यों आते हैं और इसका इलाज क्या हो सकता है। ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (Obstructive sleep apnea OSA) नींद का एक विकार है, जिसमें सांस लेते समय हवा का बहाव कम हो जता है. सोते समय सांस की यह एक आम समस्या है.

इस वजह से नींद के दौरान हवा के बहाव का ऊपरी हिस्सा काम करना बंद भी कर सकता है. ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया दिन में ज्यादा सोने से जुड़ा हुआ है. जब हवा के बहाव का मार्ग पूरी तरह से बंद हो जाता है तो उसे ऑबस्ट्रक्टिव एपनिया कहा जाता है.

जब थोड़ी सी रुकावट से हवा का बहाव कम हो जाता है तो उसे हाईपोपेनिया कहा जाता है. सोते समय किसी को भी एपनिया और हाईपोपेनिया हो सकता है.जानकारों के अनुसार, ‘एपनिया या हाईपोपेनिया की वजह से सांस कम आता है, जिससे ऑक्सीजन कम हो जाती है और कार्बन डाईऑक्साइड बढ़ जाती है. चूंकि हवा का रास्ता बंद होता है, इसलिए तेजी या जोर से सांस लेने के बावजूद ऑक्सीजन का स्तर तब तक संतुलित नहीं होता जब तक हवा का बहाव खुल नहीं जाता.’

आमतौर पर ऐसा करने के लिए व्यक्ति को नींद से जागना पड़ता है. एक बार रास्ता खुल जाए तो हम कई गहरी सांसे लेकर सांस को संतुलित करते हैं. जब पीड़ित उठता है तो वह थोड़ा सा हिल सकता है, खर्राटे ले सकता है और गहरी सांस ले सकता है. कोई व्यक्ति हांफते हुए, दम घुटने या सांस में रुकवाट महसूस होने पर बहुत कम बार पूरी तरह से उठ सकता है.

इसके प्रमुख लक्षणों में तेज आवाज में खर्राटे, कमजोरी और दिन में सोना आदि होते हैं. लेकिन कुछ लोगों में कोई भी लक्षण नजर नहीं आता. थकान और अनिद्रा के कई कारण होते हैं और आमतौर पर ज्यादा थके होना और बढ़ती उम्र इसका कारण माना जाता है.

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कुछ और लक्षण :

बेचैनी भरी नींद

हांफते हुए, दम घुटने या सांस में रुकवाट महसूस करते हुए उठना

बार बार पेशाब करने के लिए उठना

थके हुए और सुस्त उठना

याद न रहना, ध्यान लगाने में परेशानी, ऊर्जा कम रहना
इसके साथ फेफड़ों का हल्का हाईपरटेंशन भी जुड़ा रहता है. दिल का ब्लॉकेज गंभीर ओएसए की वजह से होता है, एक्सपर्ट बताते हैं कि इसे हल्कें में न लें और इसलिए मरीजों को अपनी ओएसए की जांच करवानी चाहिए.

(यह सामान्य जानकारी के आधार पर लिखा गया एक लेख है इसका चिकित्सकीय पहलु अपने विवेक पर निर्धारित करें।)


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