फिर दिखने लगी हरक की हनक, कर्मकार बोर्ड पर उठे सवाल कहीं दफन न हो जाएं!

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उत्तराखंड में सत्ता परिवर्तन के बाद जिस कैबिनेट मंत्री की सबसे अधिक हनक दिख रही है वो हैं हरक सिंह रावत। सत्ता परिवर्तन के बाद से ही हरक सिंह रावत पूरे फार्म में हैं। एक के बाद एक तीर अपने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के पर छोड़ रहें हैं। सियासी बदले भी हरक पूरी ठसक के साथ डंके की चोट पर ले रहें हैं। ऐसे में सवाल ये है कि क्या मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत हरक से कर्मकाल बोर्ड के मसले पर कोई सवाल जवाब कर पाएंगे या फिर त्रिवेंद्र के कार्यकाल में उठे सवाल यूं ही दफन हो जाएंगे?


harak singh rawat

उत्तराखंड भवन सन्निर्माण एवं कर्मकार कल्याण बोर्ड के मामले में तो ऐसा ही होता दिख रहा है। त्रिवेंद्र सरकार में जिस कर्मकार बोर्ड को लेकर खासा विवाद हुआ था और हरक सिंह रावत को जिस कर्मकार बोर्ड के अध्यक्ष से हटा दिया गया अब सत्ता परिवर्तन के बाद उसी बोर्ड को हरक अपने इशारों पर चलाने लगे हैं। हरक सिंह रावत ने न सिर्फ बोर्ड से सचिव दीप्ति सिंह को हटा दिया है बल्कि हटाए गए वो सभी कर्मचारी कर्मकार बोर्ड में फिर से वापसी कर रहें हैं। इन्हें हटाने की तारीख से ही बहाल किया जाएगा। त्रिवेंद्र सरकार ने इन्हें हटा दिया था।

दरअसल त्रिवेंद्र सरकार में कर्मकार बोर्ड को भंग करते हुए पहले सचिव दमयंती रावत को हटाया गया था। इसके बाद हरक सिंह रावत को अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। त्रिवेंद्र सरकार ने शमशेर सिंह सत्याल को नया अध्यक्ष बनाया था और सचिव पद पर पीसीएस अफसर दीप्ति सिंह को जिम्मेदारी सौंपी थी।

नए बोर्ड ने सबसे पहले हरक सिंह रावत के कार्यकाल में रखे गए 38 कर्मचारियों को हटाने का आदेश जारी किया था। इसके बाद सरकार ने कर्मकार बोर्ड का एजी ऑडिट शुरू किया था। तमाम विवादों के बीच बोर्ड के कार्यकाल की जांच भी कराई जा रही थी।

इस जांच में पूर्व सचिव दमयंती रावत अकाउंटेंट जनरल (एजी) ऑडिट टीम के निशाने पर आ गई थीं। जांच के दौरान सामने आने वालीं वित्तीय गड़बड़ियों पर ऑडिट टीम ने बोर्ड से जवाब मांगा। सचिव की कुर्सी पर बैठी दिप्ती सिंह ने दमयंती रावत से मांगे। एजी ऑडिट में करोड़ों के लेनदेन पर सवाल उठ रहें हैं. ऐसे में अब सवाल ये भी है कि मौजूदा मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत इन वित्तीय लेनदेन पर कर्मकार बोर्ड से सवाल जवाब करेंगे या फिर हरक की हनक को देखते हुए चुप रहना ही ठीक समझेंगे। सवाल सरकार के इकबाल का भी है और जीरो टालरेंस वाली छवि का भी है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि कर्मकार बोर्ड में जो पहाड़ खोदा गया है उसमें से निकलता क्या है?